जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में फीस वृद्धि के मुद्दे पर वार्ता के लिए मंगलवार को छात्र और इविवि प्रशासन के अफसर आमने-सामने बैठे, लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकला।
फीस वृद्धि के मुद्दे पर कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। मंगलवार को नॉर्थ हॉल में हुई वार्ता की शुरुआत भी विवाद से हुई। छात्रों ने सवाल उठाए कि इविवि प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए मौजूद प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रिटायर्ड शिक्षक प्रो. मनमोहन कृष्ण कैसे कर सकते हैं। छात्रोें के सवाल उठाए जाने के बाद इविवि प्रशासन की ओर से वार्ता का नेतृत्व रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने किया।
इसके बाद दोपहर साढ़े तीन बजे बातचीत शुरू हुई और छात्रों ने फीस वृद्धि वापस लेने एवं छात्रसंघ बहाली की मांगें दोहराईं। इसके पीछे छात्रों ने अपने-अपने तर्क भी दिए। हालांकि, इविवि प्रशासन की ओर से दोनों ही मुद्दों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। विश्वविद्यालय ने फीस वृद्धि के लिए कारण और औचित्य बताते हुए दोनों मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किया।
पीआरओ डॉ. जया कपूर के अनुसार छात्रों को बताया गया कि छात्र संघ के संबंध में मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इसलिए इविवि के अधिकारी कोई निर्णय नहीं ले सकते। छात्रों को यह भी बताया किया कि कुलपति ने आश्वासन दिया है कि फीस वृद्धि के कारण कोई भी मेधावी गरीब छात्र इविवि में शिक्षा पाने से वंचित नहीं रहेगा। ऐसे सभी छात्रों के बारे में निर्णय लेने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।
वार्ता में जिला एवं प्रशासन की ओर से एसपी सिटी संतोष कुमार मीणा, सिटी मजिस्ट्रेट सत्य प्रिय सिंह, एसीएम गणेश कुमार, सीओ राजेश यादव आदि और छात्र नेताओं की ओर से अखिलेश यादव, मुबाशिर हारून, सुधीर, राहुल पटेल, विजयकांत, मनीष कुमार, भानु, शाश्वत, निति भूषण, अभिषेक यादव आदि शामिल रहे।