चर्चा यह भी रही कि कुछ लोगों से इस्तीफे लिए गए हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक स्तर पर किसी ने पुष्टि नहीं की है। कानून मंत्री बृजेश पाठक ने भी इसकी पुष्टि करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रमुख सचिव न्याय प्रमोद कुमार श्रीवास्तव से पूछा था। मगर प्रमुख सचिव का कहना है कि उनके पास न तो ऐसा कोई प्रस्ताव आया है और न ही ऐसी कोई जानकारी मिली है। गौरतलब है कि गत दिनों तब्लीगी जमात से जुड़े कुछ विदेशी नागरिकों की रिहाई को लेकर दाखिल एक याचिका में कोर्ट ने आदेश का पालन न होने पर पुलिस विभाग के कई बड़े अधिकारियों को तलब किया था।
अधिकारियों ने उपस्थित होकर बताया कि उनको सरकारी वकील ने कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं दी है, इस बात पर कोर्ट नाराज हुई और कहा कि जब सुनवाई के दौरान अपर शासकीय अधिवक्ता अदालत में मौजूद थे तो उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में सूचित क्यों नहीं किया। कोर्ट ने इस मामले में सफाई देने के लिए प्रमुख सचिव न्याय को तलब किया था। प्रमुख सचिव ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा, मगर अदालत उनके द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थी। कहा जा रहा है कि इसी के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुछ लोगों पर कार्रवाई की है, मगर इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।