पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में उपस्थिति के मामले में इस बार प्रयागराज उत्तर प्रदेश में नंबर एक पर रहा। प्रदेश में अभ्यर्थियों की कुल उपस्थिति जहां 62.42 फीसदी रही, वहीं प्रयागराज में 76.46 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। पीसीएस-2018 और सहायक वन संरक्षक (एससीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ) की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को प्रदेश के 29 जिलों के 1381 केंद्रों में आयोजित की गई।
पीसीएस-2018 के तहत 831 पदों और एसीएफ/आरएफओ-2018 के तहत 92 पदों के लिए प्रदेश भर में कुल छह लाख 35 हजार 844 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। इनमें से 62.42 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित रहे। प्रयागराज के 120 केंद्रों में परीक्षा के लिए 56358 अभ्यर्थी पंजीकृत थे और इनमें से 43093 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। प्रदेश में अभ्यर्थियों की उपस्थित के मामले में दूसरे नंबर पर सुल्तानपुर जिला रहा, जहां कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 76.21 फीसदी ने परीक्षा दी। परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की गई। सुबह 9.30 से 11.30 बजे तक के पहले सत्र में सामान्य अध्ययन और अपराह्न 2.30 से शाम 4.30 बजे तक के दूसरे सत्र में सीसैट प्रश्नपत्र की परीक्षा आयोजित की गई।
प्रयागराज। पीसीएस-2018 की प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट का क्वालीफाइंग पेपर अभ्यर्थियों की सफलता में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है। पीसीएस में पहली बार माइनस मार्किंग लागू की गई और इस बार सीसैट का पेपर पिछले साल के मुकाबले कठिन था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जिस तरह यूपीपीएससी ने पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा के पैटर्न में बदलाव का निर्णय लिया है, उसका असर प्रारंभिक परीक्षा में भी दिखा और इस बार का पेपर तुलनात्मक रूप से अधिक स्तरीय रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट 85 से 90 अंकों के बीच रहने की संभावना है।
सीसैट के पेपर में कुल 100 सवाल पूछे गए और प्रत्येक सवाल दो अंकों का था। परीक्षा में क्वालीफाई करने के लिए अभ्यर्थियों को सीसैट के पेपर में न्यूनतम 66 अंक अर्जित करने होंगे। निर्माण आईएएस कोंचिंग संस्थान के निदेशक अभिषेक उपाध्याय का मानना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार सीसैट का पेपर कठिन था और पीसीएस परीक्षा में पहली बार माइनस मार्किंग भी थी। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा को क्वालीफाई करना तुलनात्मक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। मुख्य परीक्षा के पैटर्न में बदलाव का असर प्रारंभिक परीक्षा में भी दिखा। परंपरागत सवालों से हटकर इस बार नए प्रश्न पूछे गए।
द कॅरियर वर्ल्ड के निदेशक दीपक का कहना है कि सीसैट का पेपर हमेशा से ही अवरोध रहा है लेकिन इस बाद माइनस मार्किंग लागू होने और पेपर स्तरीय होने के कारण यह बड़ा अवरोध बनने जा रहे हैं। ऐसे में परीक्षा क्वालीफाई न करने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। दीपक के मुताबिक योजनाओं से जुड़े सवाल अधिक पूछे गए। पिछले साल के मुकाबले इस बार इतिहास के सवाल अच्छे और स्तरीय थे। वैसे तकरीबन सभी खंडों से सवाल पूछे गए।
पीसीएस-2018 की परीक्षा में इस बार समसामयिक मुद्दों से जुड़े सवालों ने अभ्यर्थियों को राहत दी। मेरिट सामान्य अध्ययन के पेपर के आधार पर ही बननी है और अभ्यर्थियों को यह प्रश्नपत्र संतुलित लगा। हालांकि इतिहास से जुडे़ कुछ सवाल कठिन लगे। ऐसे में जिन इतिहास विषय से जुड़े अभ्यर्थियों को अधिक फायदा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग केंद्र में आजमगढ़ से परीक्षा देने आईं रेखा ने बताया कि पेपर संतुलित और स्तरीय था। समसामयिक मुद्दों से जुड़े सवाल अच्छे थे। वहीं, इसी केंद्र में परीक्षा दे रहे इलाहाबाद के चंदौली के अनिल के मुताबिक इस परीक्षा के लिए छह माह की तैयारी काफी थी। हमेशा की तरह इस बार सवालों में दोहराव बहुत कम था। ज्यादातर नए सवाल पूछे गए थे। वहीं, के यूपीपीएसी केंद्र में परीक्षा देने आए प्रयागराज के अनिल ने बताया कि सभी खंडों से सवाल पूछे गए। प्रश्नपत्र काफी संतुलित था। इसके अलावा अन्य अभ्यर्थियों को भी प्रश्नपत्र संतुलित लगा।
सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में पूछा गया कि निम्नलिखित देशों में किसमें प्रधनमंत्री मोदी ने 11 मई 2018 को रामायण सर्किट की शुरुआत की? असम से जोड़ते हुए जुलाई 2018 में प्रकाशित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के ड्राफ्ट से संबंधित सवाल पूछा गया। जुलाई 2018 में पाकिस्तान के संसदीय चुनाव के बारे में भी सवाल आया। साथ ही 14 जून से 15 जुलाई 2018 तक रूस में आयोजित फीफा विश्व कप में टीमों की संख्या के बारे में सवाल आया। इसके अलावा पूछा गया कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस मार्ग निम्नलिखित में से किस नगर से नहीं गुजरेगा। संयुक्त राष्ट्र के ई-गवर्नमेंट सूचकांक 2018 के अनुसार भारत का कौन सा स्थान है। इसके अलावा 2011 की जनगणना से जुड़े दो सवाल भी पूछे गए।
पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा के दौरान गलत पेपर बंटने के बाद हुए बवाल के बाद रविवार को हुई पीसीएस-2018 की प्रारंभिक परीक्षा का सफल संचालन यूपीपीएससी के अफसरों के लिए बड़ी चुनौती था। यही वजह रही कि पहली बार पूरी परीक्षा की वीडियोग्राफी कराई गई। इस बार आयोग की सबसे बड़ी परीक्षा पर एसटीएफ की नजर भी थी।
आयोग की ओर से पहली बाद एक साथ दो परीक्षाएं आयोजित कराई गईं। पीसीएस के साथ एसीएफ/आरएफओ की प्रारंभिक परीक्षा भी थी। पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा में गलत पेपर बंट जाने से आयोग को एक पेपर की परीक्षा निरस्त करनी पड़ी थी और परीक्षा का आयोजन दोबारा किया गया था। अफसरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि पेपर बंटने में कहीं कोई गड़बड़ी न हो। पेपर बंटने के बाद भी अफसरों की सांसें अटकी रहीं कि कोई गड़बड़ी न हो जाए। पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थियों की संख्या 14 हजार के आसपास थी जबकि इस बार अभ्यर्थियों की संख्या तकरीबन छह लाख 35 हजार थी। ऐसे में आयोग के लिए परीक्षा का सफल संचालन बड़ी चुनौती थी। हालांकि दूसरे सत्र की परीक्षा के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली। पूर्व की परीक्षाओं के पेपर बंडल खोले जाने और उन्हें सील किए जाने की वीडियोग्राफी कराई जाती थी लेकिन इस बार पूरी परीक्षा की वीडियोग्राफी हुई। पीसीएस परीक्षा देने गए अभ्यर्थियों से बैग, मोबाइल फोन, साइकिल आदि रखने के लिए जमकर वसूली हुई। बैग और मोबाइल फोन आदि रखने के लिए अभ्यर्थियों से 20 से 30 रुपये तक वसूले गए। वहीं, साइकिल स्टैंड में भी मनमानी वसूली की गई।