एपीएस-2013 में शामिल हुए ज्यादातर अभ्यर्थी दस वर्षों तक नई भर्ती के इंतजार में ओवरएज हो चुके हैं। इन अभ्यर्थियों की ओर से आयोग में कई बार ज्ञापन देकर मांग की जा चुकी है कि एपीएस की नई भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी किया जाए और इसमें ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों को भी शामिल होने का मौका दिया जाए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि ज्यादातर भर्तियों में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर चयन हो जाता है, लेकिन एपीएस की भर्ती में टाइप और शॉर्टहैंड की अलग से तैयारी करनी होती है। अभ्यर्थी इसी परीक्षा के लिए अलग से तैयारी करते हैं। ऐसे में दस वर्षों तक नई भर्ती न होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं या होने वाले हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में जितनी देर होगी, समय के साथ ओवरएज होने वाले अभ्यर्थियों के लिए भविष्य के रास्ते भी बंद होते जाएंगे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि एपीएस की नई भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी किया जाए और ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों को अगली भर्ती में मौका दिया जाए।
विवाद और एपीएस भर्ती के बीच रहा है गहरा नाता
अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती के पिछले दो विज्ञापन विवादों में रहे। एपीएस भर्ती-2010 में धांधली को लेकर सीबीआई ने आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था। वहीं, विवाद के कारण ही एपीएस भर्ती-2013 की परीक्षा आयोग ने खुद निरस्त कर दी थी और अब आयोग नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं कर रहा है, जिससे अभ्यर्थी परेशान हैं।