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प्रतापगढ़: शहर से गांव तक अवैध पैथालॉजी, जांच के नाम पर चल रहा गोरखधंधा, सीएमओ ने साधी चुप्पी

Thu, 27 Dec 2018 11:55 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
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रानीगंज कस्बा में स्थित पैथोलॉजी लैब - फोटो : अमर उजाला
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जिले में मरीजों की जांच के नाम पर लूट मची हुई है। शहर से गांव तक बिना पैथोलाजिस्ट और रजिस्ट्रेशन के चल रहे अवैध पैथोलॉजी को सीएमओ ने पूरी छूट दे रखी है। तभी तो आज तक न एक भी पैथोलॉजी के खिलाफ न जांच हुई न कार्रवाई। हद तो यह हो गई है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते अवैध पैथोलॉजी चलाने वालों ने सरकारी अस्पतालों को हाईजैक कर रखा है। शहर में जिला और महिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी और पीएचसी के बगल अपनी दुकान खोलकर बैठे हुए हैं। डॉक्टरों से सेटिंग कर मरीजों को अपने पास बुलाते हैं।

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जनपद में महज 26 पैथोलॉजी का पंजीकरण सीएमओ ऑफिस में हुआ है। मगर शहर से गांव तक देखा जाए तो सैकड़ों पैथोलॉजी का संचालन हो रहा है। इतना ही नहीं प्राइवेट पैथोलॉजी संचालकों ने सरकारी अस्पतालों को हाईजैक कर रखा है। जनपद में जिला व महिला अस्पताल के अलावा 27 सीएचसी का संचालन हो रहा है। हर सीएचसी के करीब चार से पांच जांच घर बगैर लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। रानीगंज सीएचसी के बगल चार तो गौरा सीएचसी के बगल तीन, लालगंज के बगल दो, पट्टी कस्बे में पांच, कोहड़ौर बाजार में तीन, संडवाचंद्रिका सीएचसी के बगल दो, कुंडा में अनगिनत, बाघराय, सांगीपुर में दो-दो पैथोलॉजी का संचालन बगैर लाइसेंस के हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं।

अवैध पैथोलॉजी संचालकों ने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों से कमीशन सेट कर रखा है। डाक्टर ही जांच के लिए उनके यहां मरीज भेजते हैं। जिला अस्पताल के आसपास कई पैथोलॉजी ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट पर डॉक्टरों का भरोसा अस्पताल में चलने वाले पैथोलॉजी से अधिक रहता है। जनपद के एक भी सीएचसी के आसपास कोई रजिस्टर्ड पैथोलॉजी नहीं है। इसके बाद भी सीएमओ चुप्पी साधे बैठे हैं। बीते तीन साल के भीतर एक एक भी पैथोलॉजी की न तो जांच हुई है और न ही कार्रवाई।

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स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो शहर से लेकर गांव तक संचालित होने वाले नर्सिंगहोमों को मिलाकर कुल 26 पैथालॉजी का ही पंजीयन हुआ है। बाकी सब अवैध हैं। निजी अस्पतालों में भी पैथालॉजी के लिए पैथालाजिस्ट नहीं हैं। दरअसल, अस्पताल संचालकों के नाम पर ही पैथालॉजी का पंजीयन हुआ है। वह न तो अपने सामने जांच करा पाते हैं और न ही रिपोर्टिँग करते हैं। इसके चलते पैथालॉजी पर बैठने वाले कर्मचारी मनमर्जी रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को थमा देते हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।  

कमीशन के फेर में सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट नहीं मानते चिकित्सक 
जनपद के सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक खुद के अस्पताल की पैथालॉजी पर भरोसा नहीं करते हैं। कमीशन के चक्कर में मरीजों को परेशान करते हैं। उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भेजते हैं।  

शासन के आदेश की सीएमओ कर रहे अनदेखी 
शासन के आदेश की सीएमओ अनदेखी कर रहे हैं। शासन ने आदेश दिया है कि एमडी पैथॉलाजिस्ट के  नाम पर ही पैथालॉजी का लाइसेंस जारी किया जाए। इतना ही नहीं उसे खुद से जांच करना होगा और रिपोर्टिंग कर मरीजों को देना होगा। मगर जनपद में सिर्फ एक पैथालॉजी पर ही एमडी पैथालाजिस्ट है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर और कर्मचारी संचालकों से मोटी रकम लेकर बगैर एमडी के ही उनके लाइसेंस का रेन्यूवल कर देते हैं।  

अल्ट्रासाउंड करते हैं पैथालॉजिस्ट, खून की जांच करता है अनपढ़  
शहर में स्थित कुछ पैथालॉजी केंद्रों पर पैथालाजिस्ट अल्टासाउंड करने में लगे रहते हैं, जबकि खून-पेशाब की जांच के लिए उन्होंने दो कर्मचारियों को रखा है। वह अपने तरीके से जांच कर रिपोर्ट मरीजों को दे देते हैं।  

इस मामले में सीएमओ अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि, जिले में अवैध रूप से चलने वाले पैथालॉजी के बारे में जानकारी नहीं है। पंजीकृत पैथालॉजी के बारे में रिकार्ड देखकर ही बताया जा सकता है। 
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