यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सर्राफ और न्यायमूर्ति मंजीत शुक्ला की अदालत ने श्री रामलीला प्रबंध समिति लाइनपार की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। प्रबंध समिति ने अदालत से मांग उठाई थी। कहा था कि मुरादाबाद के नगर आयुक्त को बिजली और डीएम को अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के शहरी विद्युत वितरण मंडल के अधिशासी अभियंता को श्री रामलीला मंचन के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए श्री रामलीला प्रबंध समिति को ही निर्धारित भुगतान करना होगा। साथ ही कोर्ट ने सरकार से जवाबी हलफनामा भी तलब किया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सर्राफ और न्यायमूर्ति मंजीत शुक्ला की अदालत ने श्री रामलीला प्रबंध समिति लाइनपार की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। प्रबंध समिति ने अदालत से मांग उठाई थी। कहा था कि मुरादाबाद के नगर आयुक्त को बिजली और डीएम को अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए। याची के अधिवक्ता की दलील थी कि 112 वर्षों से हर साल होने वाली रामलीला में बिजली नगर आयुक्त ही उपलब्ध कराते आए हैं।
हालांकि, नगर निगम के अधिवक्ता ने इस दलील पर आपत्ति दर्ज कराई है। कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्षों की ओर से पेश दस्तावेजों से यह तो पता लगता है कि रामलीला के आयोजन के लिए वर्ष 2023 में 1,86,000/- रुपये का भुगतान किया गया था। लेकिन, यह नहीं पता लग रहा कि भुगतान कर कौन रहा है। इसकी जानकारी स्पष्ट जानकारी न तो अधिकारियों ने दी है और न याची ने उपलब्ध कराई है।
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कोर्ट ने रामलीला मंचन के लिए प्रबंध समिति की ओर से भुगतान किए जाने पर बिजली का अस्थायी कनेक्शन देने का आदेश दिया है। जमा की जा रही राशि का समायोजन याचिका के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा। अब मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।