पारा बढ़ने के साथ ही बाजार में आइसक्रीम की मांग तो तेजी से बढ़ी है लेकिन इस बार यह लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। कच्चे माल की कीमतों और पैकेजिंग लागत में बढ़ोतरी के कारण आइसक्रीम कंपनियों ने दामों में 20 फीसदी तक का इजाफा कर दिया है। लागत का गणित सुधारने के लिए कई कंपनियों ने आइसक्रीम के दाम बढ़ाने के साथ-साथ उसका वजन भी घटा दिया है।
दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह आइसक्रीम तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कोको और सूखे मेवों की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है। वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन बाधित होने के चलते कोको के दामों में 10 फीसदी तक की तेजी आ चुकी है। साथ ही मेवों की बढ़ती कीमतों ने प्रीमियम रेंज की आइसक्रीम को भी आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर कर दिया है।
बड़ी और नामी ब्रांडेड कंपनियों ने मुनाफा बनाए रखने के लिए दोहरा दांव खेला है। कंपनियों ने न सिर्फ आइसक्रीम के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि उनका वजन भी घटा दिया है। स्थानीय कारोबारी राशिद सगीर बताते हैं कि जो कंपनियां पहले बाजार में एक लीटर की आइसक्रीम ब्रिक उतारती थी उसका वजन अब घटकर महज 700 एमएल रह गया है।
कोल्ड चेन का खर्च भी बन गया भारी बोझ
- उद्योग के सामने कोल्ड चेन का खर्च भी भारी बोझ बन चुका है। ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। कारोबारी विनय चौरसिया ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले रेफ्रिजरेटेड वैन का परिवहन खर्च 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गया है जिसने आइसक्रीम की कुल उत्पादन लागत में और ज्यादा इजाफा कर दिया है।
ब्रांडेड कंपनियों की कीमतें (रुपये में)
आइसक्रीम : मार्च 26 : मई 26
चॉकलेट 120 एमएल : 40-45 : 45- 50
बटर स्कॉच 120 एमएल : 30- 35 : 35- 40
नट कप 125 एमएल : 40- 45 : 45-50
अल्मंड स्टिक 80 एमएल : 80- 90 : 90- 100
चोकोबार 70 एमएल : 35- 40 : 40- 45
कुल्फी स्टिक 60 एमएल : 20- 25 : 25- 30