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कैसे जल भरेंगे कांवड़िये, घाट, रास्ते सब बदहाल

Thu, 26 Jul 2018 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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चंद दिनों बाद ही सावन दस्तक देने को है। शनिवार को प्रतिपदा से इसकी शुरुआत होगी लेकिन, भोले को अभिषेक के लिए भक्त कांवड़िये अभी से उत्साहित हैं। दारागंज के दशाश्वमेध घाट या फिर संगम से बड़ी संख्या में कांवड़िये जल भर कर भोले के अभिषेक को निकलेंगे लेकिन, यहां से जाने वाले कांवड़ियों की मुश्किलें कम नहीं हैं। जहां से जल भरना है, वह घाट और वहां तक जाने वाले रास्ते ऐसे बदहाल हैं कि आज से कांवड़ यात्रा शुरू करनी हो तो सौ बार सोचना पड़ेगा। बारिश के कारण दारागंज स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर से लेकर दशाश्वमेध घाट तक जाने वाले पर रास्ते पर खोदाई की हुई है, इसके कारण वहां पर काफी मात्रा में मिट्टी और कीचड़ फैला है। ऐसे में फिसलन की आंशका ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में जल भरने के लिए जाने और वहां से लौटने पर कांवड़ियों के लिए पैदल चलना भी मुश्किल होगा।
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दशाश्वमेध घाट पर तख्त लगाने वाले गंगापुत्र घाटिया अरुण कुमार शुक्ला कहते हैं, स्नान के बाद घाट पर कांवड़ का पूजन-अर्चन कराया जाता है। मलबा और रेत की बोरियां फेंकने से रास्ता संकरा हो गया है। ऐसे में अगर प्रशासन जरूरी व्यवस्थाओं को पूरा नहीं करता है तो कांवड़िये घायल होंगे। कारोबारी शिव गुप्ता कहते हैं, मंदिर के इर्द-गिर्द बड़ी संख्या में कांवड़ के सामान की दुकाने लगती थीं, अबकी उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

कांवड़ यात्रा निकालने से पहले कावंड़िये केसरिया रंग में तैयार होते हैं। कांवड़ियों के स्वागत में दारागंज स्थित गंगाभवन के पास कांवड़ यात्रा के सामान की दुकानें सजती हैं। कांवड़िये यहीं पर कांवड़ का सामान खरीदकर यात्रा पर रवाना होते हैं लेकिन अबकी गंगाभवन मंदिर रोड के पास मलबा फैला है। टर्निंग प्वाइंट के पास दिक्कतें ज्यादा हैं। दरअसल बीते दिनों एक अखाड़े ने गंगा भवन ले लिया और अब उसे ध्वस्त करने नया निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे में उक्त भवन का मलबा वहीं पास में पड़ा है। वहीं बारिश के पानी ने ‘कोढ़ में खाज’ का काम किया है। दारागंज सब्जी मंडी, बड़े गणेश जी के मंदिर एवं दशाश्वमेध घाट पर काफी कूड़ा, कचरा, कीचड़ और गंदगी फैली है। फिलहाल बुधवार तक यहां पर प्रशासनिक स्तर पर कोई तैयारी नहीं दिखी। हां, बालू की कुछ बोरियां घाटों के पास बेतरतीब लाकर डाल दी गई हैं।
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गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यहीं दशाश्वमेध घाट से कांवड़िये जल भरेंगे लेकिन वहां घाट पर जल भरने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। अब तक वहां पर कोई बैरीकेडिंग भी नहीं की गई है जिससे तीर्थयात्रियों को गहराई का अंदाजा लग सके।

एक ओर सरकार स्वच्छ भारत अभियान के प्रचार-प्रसार में जुटी है। लोगों को खुले में शौच न करने की सलाह दी जा रही है। वहीं दशाश्वमेध घाट के पास बड़ी संख्या में पहुंचने वाले कांवड़ियों के लिए शौचालाय-मूत्रालय की कोई व्यवस्था नहीं है। समुचित इंतजाम न हुआ तो ‘खुले में शौच न करने’ की धज्जियां उड़नी तय हैं। गंगापुत्र घाटिया भक्कूगुरु कहते हैं, कांवड़ियों की संख्या को देखते हुए पर्याप्त संख्या में व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रशासन की ओर से पूर्व में मंदिर, घाट व आसपास सुरक्षा की दृष्टि से सीसी कैमरे लगाए जाते रहे हैं, अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। प्रयागराज सेवा समिति के संयोजक तीर्थराज पांडेय बच्चा भइया कहते हैं, कांवड़ियों के लिए जरूरी सुविधाओं के साथ ही सुरक्षा का मुद्दा भी अहम है। इन मुद्दों पर अविलंब ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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