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घर-मंदिर घट स्थापना, पधारो देवी अंगना

Thu, 21 Sep 2017 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू होगा। अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी नवरात्र के पहले दिन देवी के शैलपुत्री स्वरूप का पूजन एवं शृंगार किया जाएगा। शक्तिपीठ अलोपशंकरी, सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर, सिद्धपीठ कल्याणी देवी, खेमामाई मंदिर आदि को बिजली की झालरों और रेशमी कपड़ों से सजाया गया है।
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मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता धाम में कोलकाता के सज्जाकार दिनेश की देखरेख में त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का शैलपुत्री स्वरूप में शृंगार और 21 आचार्यों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ होगा। मानव कल्याण के निमित्त शतचंडी महायज्ञ, महिलाओं द्वारा दिन में चार से छह भजन-कीर्तन होंगे। धीरज नागर के मुताबिक समिति की ओर से स्वयंसेवकों की टीम तैयार की गई है। जो श्रद्धालुओं की मदद करेगी। व्यवस्था में पीसी वर्मा, संजय उपाध्याय, उमेश मिश्रा, महेंद्र मालवीय, सरदार सत्येंद्र सिंह, दिलीप केशरी, संजीव सक्सेना, विक्की चोपड़ा, कौशल आदि व्यस्त हैं। इसके अतिरिक्त सिविल लाइंस स्थित सिद्धेश्वरी गुप्तपीठ, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर मंदिर, अष्टभुजी मंदिर, सिविल लाइंस हनुमत निकेतन स्थित दुर्गा मंदिर, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कर्नलगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीबाड़ी आदि में कलश स्थापना सहित अनेक अनुष्ठान होंगे।

कल्याणी देवी मंदिर में कल्याणी देवी चांदी के चेहरे में दर्शन देंगी। श्यामजी पाठक के मुताबिक भगवती के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप में कल्याणी देवी का शृंगार होगा। देवी चांदी का चेहरा एवं आभूषण धारण कर भक्तों को दर्शन देंगी। मंदिर के कपाट सुबह पांच बजे खुलेंगे। शाम चार बजे से महाभिषेक शुरू होगा। छह बजे से शृंगार दर्शन शुरू होंगे। महाआरती शाम सात चांदी की बाती से होगी। अध्यक्ष सुशील पाठक की अगुवाई में दिलीप पाठक, आनंद जी टंडन, राजू यादव, बबलू सिंह, सोनू श्रीमाली, पवन सिंह आदि व्यवस्था में लगे हुए हैं।
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सिद्धपीठ अलोपशंकरी मंदिर में शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में भगवती का पालना बुधवार की मध्यरात्रि बारह बजे बदला गया। नया पालना वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि की देखरेख में चढ़ाया गया। इसके साथ ही मंदिर में विशेष अनुष्ठान पूजा शुरू हुई। महंत जमुनापुरी के मुताबिक श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए अखाड़े की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है।

कलश स्थापना का अभिजित मुहूर्त बृहस्पतिवार की दोपहर 11.36 से 12.24 तक का है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश राय के मुताबिक अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा बुधवार को सुबह 10.22 के बाद आरंभ होकर बृहस्पतिवार की सुबह 9.57 तक रहेगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सूर्योदय 5.58 से लेकर सुबह 9.57 तक है।
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