अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की पूर्व संध्या पर मंगलवार को विभिन्न संगठनों की ओर से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। जनहित संघर्ष समिति की ओर से बसंती रंग से होली खेलकर शहीदों को याद किया। संयोजक प्रवीण गुप्ता ने कहा कि बसंती रंग क्रांतिकारियों का प्रतीक होता है, इसलिए हमने बसंती रंग से होली खेली। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि होली खेलने में बसंती रंग का प्रयोग करें। इस दौरान राजेश केसरवानी, लल्लूलाल, विवेक, आर्यन, कुलदीप, महेंद्र आदि उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के सदस्याें ने आजाद चंद्रशेखर पार्क में शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर प्रो. कृष्ण मुरीद ने कहा कि भगत सिंह ने स्वतंत्रता के लिए अपने जान की आहुति दी, जिससे सभी वर्ग के लोगों को शिक्षा, रोटी, कपड़ा समान रूप से मिले। विदेशियों के सामने हाथ न फैलाना पड़े। संचालन कर रहे राम सागर ने जेएनयू के कन्हैया से भगत सिंह की तुलना करने को गलत ठहराया। इस दौरान मुस्तकीम अहमद, अवधेश यादव, चंद्र मोहन, अजमत अहमद, सुधीर कुमार आदि उपस्थित रहे। राष्ट्रीय युवा क्रांतिकारी मोर्चा और भारतीय जन अधिकार मंच के संयुक्त तत्वावधान में चौके स्थित ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दो मिनट का मौन उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
मिट्टी से होली का तिलक लगाकर मातृभूमि को नमन किया। बसंत लाल आजाद ने कहा कि होली और शहादत दिवस दोनों एक साथ है। दोनों में से किसी की अनदेखी नहीं की जा सकती। देशभक्ति और होली का उत्साह दोनों को गाढ़ा रंग जीवन में घोले। एक चुटकी से मिट्टी से होली का तिलक करें। इस दौरान अतुल खन्ना, अतुल तिवारी, सत्य प्रकाश तिवारी, राकेश कुमार, अजित सिंह आदि लोग मौजूद रहे। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी शहीदों को नमन किया। अनिकेत सक्सेना ने भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता पर विचार रखें। इस मौके पर डॉ. दया शंकर सिंह, अंजनी मिश्रा आदि मौजूद रहे।