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hockey olympics : पिता ने पसीना बहाया, गुरजीत को भारत का कोहिनूर बनाया

Wed, 04 Aug 2021 09:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • संघर्षों से भरा रहा गुरजीत का सफर, पिता 12 किमी दूर साइकिल से ले जाते थे स्कूल 
  • गुरजीत कौर की बड़ी बहन प्रदीप कौर ने अमर उजाला से बातचीत में साझा की यादें
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गुरजीत कौर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में भले ही भारतीय महिला हॉकी टीम अर्जेंटीना की टीम से हार गई हो, लेकिन इस मैच की भी नायिका गुरजीत कौर ही रहीं। उनके खेल की वजह से अर्जेंटीना की टीम भारतीय टीम पर हावी नहीं हो सकी। इससे पहले गुरजीत के गोल की वजह से भारतीय महिला हॉकी टीम अंतिम चार में पहुंची थी। गुरजीत की सफलता में उनके पिता की अथक मेहनत शामिल है। उनके परिश्रम से बेटी भारत का कोहिनूर बन सकी। 

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गुरजीत कौर का शुरुआती सफर संघर्षों भरा रहा। गुरजीत कौर के पिता सरदार सतनाम सिंह बड़ी बहन प्रदीप कौर के साथ 12 किमी दूर साइकिल से स्कूल छोड़ने कैंरो कस्बे जाते थे। गांव से स्कूल जाने के लिए बस भी नहीं थी तो बहुत परेशानी होती थी। इसी वजह से पिता ने दोनों का दाखिला तरनतारन के बोर्डिंग स्कूल में करा दिया। यहीं से शुरू हुआ हॉकी से जुड़ाव का सफर। संघर्ष की यह दास्तां गुरजीत कौर की बड़ी बहन प्रदीप कौर ने अमर उजाला से साझा की। प्रदीप कौर भी हॉकी की नेशनल खिलाड़ी हैं और जालंधर में खेल विभाग में तैनात हैं। 

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prayagraj news : गुरजीत कौर। - फोटो : prayagraj
पंजाब के अमृतसर जिले के ग्राम मियादी कलां की रहने वाली प्रदीप कौर के मुताबिक उनका पूरा परिवार बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करता था। वह बड़ी थीं, जबकि गुरजीत दूसरे नंबर की हैं। सबसे छोटे भाई ने इसी साल इंटर पास किया है। घर में कोई नौकरी पेशा नहीं था। पिता सतनाम सिंह और चाचा बलजिंदर सिंह किसानी करते हैं। लेकिन दोनों बेटियों को अच्छी शिक्षा देना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने दोनों बहनों का दाखिला तरनतारन के बोर्डिग स्कूल में कक्षा छह में करा दिया। यहां दाखिले के बाद गुरजीत कौर और प्रदीप कौर ने हॉकी खेलना शुरू किया। गर्वनमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में खेलों का अच्छा माहौल था। 
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गुरजीत कौर - फोटो : सोशल मीडिया
कोच सरनजीत सिंह ने निखारी प्रतिभा
गुरजीत कौर के शुरुआती कोच सरदार सरनजीत सिंह रहे। उन्होंने गुरजीत की हॉकी में दिलचस्पी देखी और प्रशिक्षण देना शुरू किया। स्कूल में गुरजीत को छात्रवृत्ति भी मिली। गुरजीत खेल पर ज्यादा ध्यान देती थीं। वह पढ़ाई में औसत रहीं। गुरजीत ने जालंधर के खालसा कॉलेज से बीए किया। इस दौरान वह कॉलेज की अकादमी की ओर से पांच साल तक खेलीं। 

छठी क्लास में पिता ने दी थी हॉकी स्टिक
गुरजीत कौर की बड़ी बहन प्रदीप कौर बतातीं हैं कि पिता सरदार सतनाम सिंह ने बहन गुरजीत कौर को हॉकी स्टिक गिफ्ट की थी। पिता बोर्डिंग स्कूल में दूसरी बच्चियों को खेलते देखते थे तो उनकी भी इच्छा होती थी कि दोनों बेटियां हॉकी खेलें। इसी कारण उन्होंने छठवीं क्लास में हॉकी स्टिक, ट्रैक सूट और जूते लाकर दिए। इसके बाद बहन ने जब खेलना शुरू किया तो पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एनसीआर में तैनाती के बाद मिली बुलंदी
गुरजीत कौर ने 2016 में एनसीआर के प्रयागराज मंडल में बतौर सीनियर कलर्क ज्वाइन किया। यहां से गुरजीत की किस्मत बदली। इस दौरान उनका भारतीय हॉकी टीम में चयन हो गया। गुरजीत ने 2018 में एशियन गेम्स में हिस्सा लिया। कॉमनवेल्थ गेम्स में गुरजीत कौर भारतीय टीम का हिस्सा रहीं।
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