वहीं, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि युवती ने बयान में कहा कि उसने दिल्ली के सरकारी स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की थी और नई दिल्ली में एक फैक्ट्री में काम कर रही थी। यहीं पर उसकी मुलाकात आरोपी युवक से हुई। युवक अपनी कलाई पर पवित्र लाल धागा बांधा हुआ था। उसने ने मुसलमान होने की बात छुपाई थी। आरोपी ने युवती को जब अपने घर ले गया तो उसे पता चला कि वह मुसलमान है और उसके निवास के संबंध में फर्जी दस्तावेज बनाए गए थे। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि झूठे दस्तावेज तैयार करने के बाद लड़की को झूठे बहाने से मुस्लिम धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था।
कोर्ट ने कहा कि लड़की के बयान से यह स्पष्ट है कि आवेदक ने उसे यह विश्वास दिलाया था कि वह धर्म से हिंदू है। जब युवती आवेदक के गांव पहुंचती तो उसे पता चला कि आवेदक धर्म से मुस्लिम है। अन्य तथ्यों का संज्ञान लेते हुए आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।