रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के लिए किसानों की जमीनें छीनने के आरोपों पर हाईकोर्ट गंभीर है। मंगलवार को इस प्रकरण पर सुनवाई करते समय कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों को उत्पीड़ित किया जा रहा है तो ऐसा किसी भी हालत में नहीं होना चाहिए। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आरडी खरे ने साफ किया कि वह मौजूदा हालात पर काफी गंभीर हैं।
रामपुर के मो. हसन और अन्य किसानों द्वारा दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा कि किसी का भी उत्पीड़न किए जाने की शिकायत गलत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उत्पीड़न या जोर जबरदस्ती जैसी कोई घटना नहीं होने पाएगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश पर रामपुर के दस किसान भी अदालत में उपस्थित हुए जिनका कहना था कि जमीनें लेने के लिए उनसे जबरदस्ती की गई। कोर्ट ने इन सभी का बयान दर्ज करवाया।
महाधिवक्ता ने किसानों के बयान का विरोध किया। उनका कहना था कि जिन लोगों से जमीनें ली गई वह इस याचिका में शामिल नहीं हैं। जिन लोगों से जमीनें नहीं ली गई हैं उन्होंने याचिका दाखिल की है। किसानों से जमीनें लेते समय उनको बाजार भाव से काफी अधिक मूल्य दिया गया है। याची के अधिवक्ता प्रमोद कुमार सिन्हा का कहना था कि अवमानना याचिका एक जनहित याचिका के आदेश को लेकर दाखिल की गई है इसलिए आदेश सभी के लिए है। कोर्ट ने याची अधिवक्ता को अगली तिथि पर ऐसे लोगों का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है जिनकी जमीनें ली जा चुकी हैं। याचिका पर 21 जनवरी को अगली सुनवाई होगी।