फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के खिलाफ याचिका खारिज, याचिका दायर करने वालों पर लगा हर्जाना

Fri, 19 Jun 2020 07:34 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
amarujala - फोटो : amarujala
विज्ञापन

हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट रोकने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं को कोर्ट से झटका लगा है। हाइकोर्ट ने उनकी याचिका तथ्य विहीन करार देते हुए न सिर्फ खारिज़ कर दी है, बल्कि अदालत को गुमराह करने और समय बर्बाद करने पर तीनों याचिकाकर्ताओं पर पांच पांच हज़ार रुपए का हर्जाना भी लगाया है।

विज्ञापन


अवमानना याचिका काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह के खिलाफ दाखिल की गई थी। कोर्ट ने कहा है कि एक पत्रकार और दो वकीलों ने अधूरे गुमराह करने वाले तथ्यों के साथ कोर्ट आदेश की अवहेलना के आरोप में याचिका दाखिल की है जबकि उन्होंने स्वयं कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया।

kashi vishwanath - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने टिप्पणी की है कि तथ्य छिपाना वकालत नही है, जगलरी है। जिसके लिए तीनो पांच पांच हजार रूपये हर्जाने के तौर पर काशी विश्वनाथ विशेष एरिया विकास बोर्ड में एक माह मे जमा करे। कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट में साढे नौ लाख विचाराधीन मुकदमे है।ऐसी व्यर्थ की याचिकाए अदालतों का समय बर्बाद करती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा है कि बोर्ड कानून के तहत गठित है। कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने से पहले सम्बंधित विभागो एवं कोर्ट से वाराणसी में गंगा घाटो के पौराणिक पुरातात्विक स्वरूप को कायम रखते हुए निर्माण की अनुमति ली गई है। इससे दर्शनार्थियों, पर्यटको,स्थानीय लोगो को सुविधा दी जाएगी।

kashi vishwanath corridor - फोटो : amar ujala
घाटों की मरम्मत व नव निर्माण की अनुमति ली गई है। कोर्ट ने कहा है कि बिना सही तथ्य का पता लगाये अवमानना याचिका दाखिल की गई है। याचिका दाखिल करने पर ही यह साबित करने का भार होता है कि कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की जा,रही है। याची यह साबित करने में विफल रहे। खुद कोर्ट के पूरक हलफनामा दाखिल करने के आदेश का पालन नहीं किया।

kashi vishwanath corridor - फोटो : amar ujala
यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी ने प्रदीप कुमार श्रीवास्तव व दो अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अजय कुमार सिंह व सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी व विनीत संकल्प ने बहस की थी। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था और फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी है।
विज्ञापन

इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
याचिका में कहा गया था कि हाइकोर्ट ने वाराणसी में गंगा किनारे 200 मीटर तक निर्माण पर रोक लगाई है। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट का निर्माण 200 मीटर के दायरे में किया जा रहा है। इसे,आदेश की अवहेलना करार देते हुए अवमानना याचिका दाखिल की गई।कोर्ट ने,याचियो से दस्तावेज मांगे तो बिना हस्ताक्षर, बिना शपथपत्र के पेपर दाखिल कर दिया।

कहा लाक डाउन के कारण हलफनामा नही हो सका। सरकार की ओर से आपत्ति की गई कि याचिका अधूरे गुमराह करने वाले तथ्यों के साथ दुर्भावना से प्रेरित होकर दाखिल की गई है। बोर्ड कानून के तहत गठित है।कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए विकास कार्य किया जा,रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें