कोरोना काल में निमंत्रण का ट्रेंड बदल गया है। भीड़ जुटाने की मनाही व सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदियों के चलते शादी-विवाह, जन्मदिन, गृहप्रवेश सहित अन्य मांगलिक आयोजन गिने-चुने रिश्तेदारों के बीच ही सिमट कर रह गए हैं। रंग-बिरंगे महंगे आकर्षक एवं डिजिटल कार्डों का चलन भी खत्म हो गया।
महंगे कार्ड छपवाकर लोग भीड़ जुटाने के बजाए लोग फोन से ही रिश्तेदारों व मित्रों को निमंत्रण देकर कार्यक्रम संपन्न कर ले रहे हैं। इस नए ट्रेंड से सहालग के दिनों में कार्ड की छपाई कर लाखों की कमाई करने वाले प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को तगड़ा झटका लगा है। उन्हें लाखों की चपत लगी है।
विज्ञापन
Trending Videos
marriage card image
- फोटो : pratapgarh
आमतौर पर वर्ष में दो बार शादी-विवाह के मुहूर्त पड़ते हैं। गृह प्रवेश, रामायण, जन्मदिन प्रीतिभोज सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रमों का दौर तो सालभर चलता है। इन कार्यक्रमों में रिश्तेदारों, ईष्टमित्रों, जान-पहचान व पास- पड़ोस के लोगों की भीड़ उमड़ती है।
कार्यक्रम के लिए बाकायदा इन्हें निमंत्रण कार्ड भेजा जाता है। कार्यक्रम महीने भर पहले ही लोग कार्ड छपवा लेते थे। अप्रैल, मई व जून के साथ नंबर, दिसंबर और फरवरी महीने में कार्ड की छपाई के लिए प्रिंटिंग प्रेसों पर भीड़ लगी रहती है। लोग एक से बढ़कर एक डिजाइन के कार्ड तैयार कराते थे।
marriage card image
- फोटो : pratapgarh
डिजिटल युग में निमंत्रण कार्ड भी काफी आकर्षक हो गए हैं। शादी-विवाह के कार्डों में तो बकायदा दूल्हा-दुल्हन की फोटो के साथ वीडियो का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। लोग लाखों रुपये कार्ड छपवाने में ही खर्च कर देते हैं।
अब कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदियों के चलते फिर निमंत्रण का ट्रेंड बदल गया है। भीड़ जुटाने पर रोक के चलते कार्ड से निमंत्रण देने का चलन नहीं रहा। इससे प्रिटिंग प्रेस वालों को तगड़ी चपत लगी है। कार्ड छपाई के लिए कोरोना काल में एक भी आर्डर नहीं मिला। इससे उन्हें लाखों का नुकसान हुआ।
marriage card image
- फोटो : pratapgarh
पल्टन बाजार स्थित विवेक प्रिंटिंग प्रेस के संचालक धीरज उपाध्याय ने बताया कि शादी- विवाह के कार्यक्रमों के दौरान कार्ड आदि की बुकिंग की भरमार रहती थी। इन्हीं दिनों गृहप्रवेश सहित मांगलिक कार्यक्रमों में भोज के लिए निमंत्रण कार्ड की छपाई के आर्डर मिलते थे।
मगर इस बार कोरोना के चलते लाखों की चपत लगी है। पाबंदियों के चलते लोग फोन से गिने-चुने रिश्तेदारों व मित्रों के बीच कार्यक्रम संपन्न कर रहे हैं। इससे कार्ड के लिए आर्डर नहीं मिले।
यही हाल रानीगंज के उमेश प्रिंटिंग प्रेस, संतोष प्रिंटिंग प्रेस व प्रिंस प्रिंटिंग प्रेस के संचालकों का भी है। प्रिंस ने बताया कि कोरोना के चलते इस बार की कमाई पर पानी फिर गया है। आगे भी आसार नहीं दिख रहे हैं।