मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने 17 जुलाई को मामले की सुनवाई की। हालांकि याचिका सुनवाई के लिए 20 जुलाई को नियत थी।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आयुष मंत्रालय ने होम क्वारंटीन में रहने या अपनी पसंद के स्थान पर स्वयं क्वारंटीन में रहने के निर्देश जारी किए हैं। फिर भी कोरोना संदिग्ध को जबरन सेंटर ले जाया जा रहा है। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि अपने घर या मर्जी से स्वयं क्वारंटीन होने के बारे मे सरकार कदम उठाने जा रही है। संस्थागत आईसोलेशन का स्कोप बढाने के कदम उठाए जाएंगे ।
इसके अलावा शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए पुलिस पेट्रोलिंग एवं स्पीकर से उद्घोषणा की जा रही है। शारीरिक दूरी की महत्ता की जानकारी दी जा रही है। शारीरिक दूरी न बनाने व मास्क न पहनने वालो पर अर्थदंड लगा कर सख्त संदेश दिया जा रहा है। आईजी पुलिस केपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि नियमित पेट्रोलिंग कर पेन्डेमिक रेग्यूलेशन 20 का कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
उन्होंने नगर निगम को निर्देश देने की मांग की कि दूकानों में और बाहर भीड़ न लगने पाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह 13 जुलाई को ऐसे आदेश जारी कर चुके हैं। कोर्ट ने नगर आयुक्त से इस आदेश के अनुपालन के साथ हलफनामा मांगा है। सीएमओ प्रयागराज की तरफ से मौजूद डॉ. मंगेश कुमार श्रीवास्तव से कोर्ट ने हाईकोर्ट में डाक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ की जानकारी मांगी है। याचिका की अगली सुनवाई 24जुलाई को होगी।