इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पूरक विवेचना रिपोर्ट में संकलित साक्ष्यों पर भी अपराध से उन्मोचित करने की अर्जी पर विचार करना जरूरी है।केवल पहले दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने के आधार पर उन्मोचित करने की अर्जी खारिज करना सही नहीं है।
कोर्ट ने कहा चार्जशीट दाखिल होने के बाद पेश आरोप से बरी करने की पूरक पुलिस रिपोर्ट चार्जशीट का हिस्सा है और अभियुक्त की अपराध से उन्मोचित करने की अर्जी की सुनवाई के समय दोनों पुलिस रिपोर्ट पर संयुक्त विचार किया जायेगा।
कोर्ट ने जानलेवा हमले की चार्जशीट और पूरक पुलिस रिपोर्ट में जानलेवा हमले से बरी करने की रिपोर्ट पर विचार न करने को अवैध करार दिया है और डिस्चार्ज अर्जी खारिज करने के विचारण अदालत के आदेश को रद कर दिया है तथा डिस्चार्ज अर्जी को नये सिरे से तय करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने वाराणसी कैंट थाना क्षेत्र में एक क्लब के सचिव अशोक वर्मा की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर तर्क दिया किअग्रिम विवेचना रिपोर्ट में संकलित साक्ष्यों पर उन्मोचन अर्जी की सुनवाई के समय विचार करना जरूरी है। मात्र पूर्व में दाखिल चार्जशीट पर ही विचार कर अर्जी निरस्त नहीं की जा सकती।
कहना था कि शिकायतकर्ता का भाई आशीष राठी पी एन यू क्लब गया था।जहां याची से झगड़ा हुआ।याची ने उसे मारपीट कर बाहर निकाल दिया और पिस्तौल से फायर किया।जिसे चश्मदीदों ने देखा।
कैंट थाने में दोनों पक्षों ने एफ आई आर दर्ज कराई। पुलिस ने याची के खिलाफ मारपीट व फायर करने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की। किंतु विवेचना जारी रही। बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट में पिस्टल से फायर नहीं होने की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने पूरक रिपोर्ट में याची को केवल मारपीट करने का आरोपी बनाया किंतु जानलेवा हमले के आरोप से बरी कर दिया।
याची ने इसके आधार पर डिस्चार्ज अर्जी दी किंतु कोर्ट ने पहले दाखिल चार्जशीट जिसपर कोर्ट संज्ञान ले चुकी थी, अर्जी खारिज कर दी। हाईकोर्ट में सवाल उठा दो पुलिस रिपोर्ट है तो डिस्चार्ज अर्जी पर केवल एक रिपोर्ट पर ही विचार करना सही है। कोर्ट ने कहा दोनों रिपोर्ट संयुक्त रूप से देखी जायेगी।