एकल पीठ के आदेश को दी गई थी चुनौती
मामले में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों का तर्क था कि उन्होंने सामान्य श्रेणी के लिए कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, इसलिए वे अनारक्षित पदों के लिए विचार करने और चुने जाने केे हकदार हैं। इसलिए राज्य ने आरक्षण नीति के कार्यान्वयन पर फिर से विचार किया और 68 सौ उम्मीदवारों के नाम वाली एक नई चयन सूची जारी करने का निर्णय लिया।
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद यूपी सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। वर्तमान मामले में एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई नियुक्ति रिक्तियों के विज्ञापन के बिना करने की मांग की जाती है तो वह संविधान के अनुच्छेद-16 समान अधिकार का उल्लंघन होगा।