इन सभी पुलिसकर्मियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम तथा सहयोगी अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम का तर्क था कि निलंबन आदेश पारित करते समय पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन के लिए पर्याप्त साक्ष्य होने चाहिए। कहा गया था कि अधिकारी के पास कोई ऐसा साक्ष्य अथवा तथ्य नहीं था जिसके आधार पर आठ पुलिसकर्मियों का निलंबन किया जा सके।
अधिवक्ता का तर्क था कि निलंबन आदेश आनन-फानन में बगैर नियम तथा कानून का पालन किए पारित किया गया है। पांच अगस्त को एसपी मिर्जापुर ने सभी आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया और उसी दिन एएसपी यातायात डॉ.अरुण कुमार सिंह को सात दिनों के अंदर प्रारंभिक जांच करके रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। इससे स्पष्ट था कि निलंबन आदेश पारित करते समय कोई साक्ष्य नहीं था।
मामले के अनुसार सभी आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप था कि माफिया विजय मिश्रा की पांच अगस्त 2022 को एसीजेएम प्रथम मिर्जापुर के यहां पेशी थी। विजय को आगरा पुलिस की सुरक्षा में मिर्जापुर लाया गया था। परंतु, मिर्जापुर की कोर्ट में तैनात पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी गई थी। परिणामस्वरूप कोर्ट से लौटते समय माफिया विजय मिश्रा की ओर से पुलिस अभिरक्षा में रहते हुए अनर्गल बयानबाजी की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई तथा एडीजी लॉ एंड ऑर्डर तथा प्रदेश के अन्य नेताओं के खिलाफ भी बयानबाजी की गई।
माफिया विजय मिश्रा के इस कार्य से अफरा-तफरी मचने के साथ ही कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो गई थी। घटना को लेकर मौके पर तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर, दो दरोगा, दो हेड कांस्टेबल, व तीन सिपाहियों को कर्तव्य पालन में लापरवाही, उदासीनता एवं शिथिलता के आरोप में एसपी मिर्जापुर ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।