अधिकारी और कर्मचारियों को मनमानी की छूट नहीं दी जा सकती
कोर्ट ने कहा कि पालिका परिषद राज्य की श्रेणी में है। इसके अधिकारी लोक कर्तव्य निभाते हैं। संविधान सर्वोच्च है और देश की संप्रभुता आम जनता में निहित है। संविधान की आधार शिला सामाजिक व आर्थिक न्याय का उल्लघंन है। अधिकारियों व कर्मचारियों ने जनसेवक की जवाबदेही स्वीकार की है। उनके पास कानूनी अधिकार व मशीनरी है। यह ताकत आम लोगों के पास नहीं है। लिहाजा, वे आम लोगों को परेशान न कर अपना विधिक दायित्व पूरा करें। इन्हें मनमानी की छूट नहीं दी जा सकती कि वे समाज को क्षति पहुंचाएं।
कोर्ट ने कहा कि यह अदालत का दायित्व है कि वह जरूरी कदम उठाकर जन विश्वास कायम रखे। उनमें भरोसा कायम रहे कि वे असहाय नहीं हैं। अधिकारियों की मनमानी रोकने की कोई बड़ी अथॉरिटी मौजूद नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मुक्तिनाथ राय केस में सेवानिवृत्ति परिलाभों के संबंध में समय से भुगतान के लिए जारी सामान्य समादेश का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया।
यह है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हर विभाग के मुखिया हर छह माह में एक जनवरी व एक जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों की सूची तैयार करेंगे। इसके 12 से 18 माह में समस्त देय तय कर लें और 31 जनवरी व 31 जुलाई तक ऑडिट अधिकारी को अग्रसारित करें। इसके बाद भुगतान की जवाबदेही अकाउंटेंट जनरल कार्यालय की होगी।