इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपूर्ति प्राप्त करने के बाद बजट की कमी का हवाला देकर निर्माण कंपनी को भुगतान नहीं करने के उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपूर्ति प्राप्त करने के बाद बजट की कमी का हवाला देकर निर्माण कंपनी को भुगतान नहीं करने के उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को ‘मॉडल एम्प्लॉयर’ माना जाता है। ऐसे में बजट के अभाव में भुगतान से इन्कार करने का उसका दृष्टिकोण पूरी तरह अस्वीकार्य है।
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न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने मेसर्स एसआरके कंस्ट्रक्शन कंपनी की याचिका पर यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान विपक्षी अधिवक्ता ने बताया कि धन की कमी के कारण याचिकाकर्ता को भुगतान नहीं किया जा सका। सामग्री की आपूर्ति वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2017 के बीच की गई थी। उस समय के वार्षिक बजट की बची हुई धनराशि राज्य को वापस चली गई है। इसलिए नया बजट मिलने के बाद ही भुगतान संभव है।
इस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि राज्य ने जरूरत पड़ने पर कंपनी से सामग्री की आपूर्ति करा ली लेकिन अब धन की कमी बताकर भुगतान नहीं कर रहा है। खंडपीठ ने प्रमुख सचिव, शहरी विकास विभाग को छह सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता की देय राशि जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है।