इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के 24 साल पुराने मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए सभी जीवित अपीलार्थियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के 24 साल पुराने मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए सभी जीवित अपीलार्थियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने यह फैसला सुनाया। मामला अलीगढ़ के गभाना थाना क्षेत्र का वर्ष 2000 का है। 26/27 दिसंबर 2000 की रात पीड़िता का अपहरण किया गया था। उसे 30 दिसंबर 2000 को दौराऊ चौराहे से बरामद किया गया।
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पीड़िता ने राजू और उसके सगे भाई महेश पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ने आरोपियों को दोषी ठहराया था। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए गुड्डी, राजकुमारी उर्फ गुलकंदी, जयपाल सिंह, ऋषिपाल और महेश को बरी कर दिया।