इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है, जब मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में उत्तर प्रदेश के निवासियों के इलाज के लिए समुचित बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए। यह टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को निर्देश दिया कि वह 10 अप्रैल को राज्य के मेडिकल कॉलेजों का विवरण उपलब्ध कराएं। साथ ही उनमें उपलब्ध बुनियादी ढांचे के बारे में भी अवगत कराएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने डॉ. अरविंद गुप्ता की याचिका पर दिया। हाईकोर्ट ने प्रदेश भर में विभिन्न सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों के उन डॉक्टरों की सूची मांगी थी जो प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं साथ ही उनपर हुई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा था।
तीन अप्रैल को अपर महाधिवक्ता ने न्यायालय को सूचित किया कि प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा की ओर से 28 मार्च को एक हलफनामा दायर किया गया था, जो रिकॉर्ड पर नहीं है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
इस पर न्यायालय ने पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों का पूरा विवरण और उनके बुनियादी ढांचे की जानकारी देने के लिए प्रमुख सचिव को निर्देश दिया। साथ ही कार्यालय को अगली तारीख पर हलफनामे का पता लगाकर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।