बच्चे माता पिता की देखभाल के लिए कानूनन बाध्य
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 का हवाला देते हुए हंडिया एसडीएम को छह सप्ताह के भीतर बुजुर्ग पिता की शिकायतों पर सभी हितधारकों को सुनने के बाद सख्ती से विधि सम्मत निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
याचिका को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने प्राचीन हिंदू ग्रंथों में श्रवण कुमार की कहानी का जिक्र किया। कहा कि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने, उनकी गरिमा को बनाए रखने और बुढ़ापे में उनका सम्मान करने के लिए कानूनन बाध्य हैं। वहीं, आजकल कई मामलों में बच्चे अपने माता-पिता से संपत्ति प्राप्त करने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं। यह न सिर्फ दुखद है बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों में निरंतर आ रही गिरावट का प्रतीक भी है।