हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी जनहित याचिकाओं का निपटारा किया। साथ ही संबंधित विभाग को तीन महीने की अवधि के भीतर प्रधानों, विशेष रूप से महिलाओं को उनके अधिकारों और कार्यों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का निर्देश दिया।
रवींद्र नाथ राय की जनहित याचिका पर निर्देश दिया कि यदि पानी टंकी का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। संभव हो तो संबंधित अधिकारी उक्त गाटा के कोने में स्थानांतरित कर लें। सुनील की जनहित याचिका में निर्देश दिया गया है कि प्रधान या स्वयं प्रधान के परिवार के किसी भी व्यक्ति ने यदि गांव सभा की भूमि पर अतिक्रमण किया है तो उसे आज से एक महीने के भीतर हटा दिया जाए। कोर्ट ने प्रमुख सचिव, पंचायत राज विभाग, उप्र शासन को आदेश के अनुपालन के लिए प्रति आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है।
ग्रामीण के बीच सहमति बनाना जरूरी
कोर्ट ने किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षित जमीन का छोटा हिस्सा भी सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है तो राज्य के अधिकारी संबंधित ग्रामसभा संग सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। ताकि, ग्रामीण सार्वजनिक मुद्दे का विरोध करने के लिए इस न्यायालय का दरवाजा न खटखटा सकें।