इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरे के लिए सुरक्षित पद पर कार्यरत रहने और बाद में नियमित होने पर पेंशन आदि निर्धारण में अस्थाई सेवाएं जोड़ने से इंकार के आदेश को सही माना है। एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज करने के आदेश को सही करार दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी व न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने जंगपाल की अपील को खारिज करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा याची की नियुक्ति सरप्लस कर्मचारियों के लिए आरक्षित पद पर अस्थाई रूप से की गई थी, जो एक माह की नोटिस पर कभी भी समाप्त की जा सकती है। सरप्लस कर्मचारी के न होने पर ही उसकी नियुक्ति हो सकती थी। विभाग में 13 सरप्लस कर्मचारियों को समायोजित किया जाना बाकी था। इसमें याची की नियुक्ति बैक डोर से कर दी गई। ऐसे में उसकी अस्थाई सेवाएं पेंशन आदि निर्धारण में नहीं जोड़ी जा सकती। विभाग ने पेंशन के लिए निर्धारित सेवा पूरी न होने से सेवानिवृत्त होने पर पेंशन आदि देने से इंकार कर दिया गया था। उसे चुनौती दी गई थी।