याचियों की ओर से कहा गया कि वह चयनित हैं और कई जिलों में प्रांतीय रक्षक दल में तैनात हैं। उन्हें भी उत्तर प्रदेश होम गाड्र्स अधिनियम 1963 के तहत चयनित होमगार्डों के समान भुगतान किए जाने वाले लाभों को प्रदान किया जाना चाहिए। याचियों की ओर से कहा गया कि उनका चयन संयुक्त प्रांत रक्षक दल अधिनियमए 1948 के आदेश के अनुसार हुआ है। वह सार्वजनिक शांति के संरक्षण के लिए पुरुषों को हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देकर आत्मसहायता और अनुशासन पैदा करने और प्रदेश के भीतर समुदाय और संपत्ति के जीवन की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। वे आपातकाल और भूमि एवं व्यवस्था के रखरखाव के लिए पुलिस के सहायक के रूप में कार्य करते हैं।
यह तर्क दिया गया है कि उत्तर प्रदेश होम गार्ड अधिनियम के साथ-साथ प्रांतीय रक्षक दल के तहत नियुक्त होम गार्ड को 2009 तक 126 रुपये प्रति दिन की दर से दैनिक ड्यूटी भत्ता का भुगतान किया जा रहा था। वर्ष 2010 में बढक़ार 140 रुपये और वर्ष 2013 में इसे और बढ़ाकर 210 रुपये कर दिया गया और बाद में इसे और भी बढ़ाया गया लेकिन उन्हें वर्ष 2013 तक 126 रुपये मिलते रहे। याचियों ने यूपी सरकार से दैनिक भत्ता बढ़ाने की मांग की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि, 2018 में होमगार्डों का भत्ता बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दिया गया। याचियों ने उसे चुनौती दी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।