कोर्ट ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण मानव रूप में जेल में प्रकट हुए। मान्यता है कि जेल पर मस्जिद बनी हुई है। यह अधिकारों व इतिहास का भी विषय है। इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 लागू होगा या नहीं, यह तय होना है। संविधान के अनुच्छेद 25, 26, और 300ए, सेवायत, जन्मस्थान जैसे कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे। सभी मामले एक साथ हाईकोर्ट में सुने जाने से किसी के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व शाही ईदगाह मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने केसों के हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का विरोध किया है। कहा कि सिविल कोर्ट को ट्रायल करने का अधिकार है। वहां भी ट्रायल हो सकता है।
किंतु, हाईकोर्ट ने कहा लोक महत्व का मामला है। कई संवैधानिक व कानूनी व्याख्या के मुद्दे निहित हैं। जिनका निस्तारण हाईकोर्ट में किया जाना चाहिए। कोर्ट ने जिला जज मथुरा को वादों की सूची तैयार कर दो हफ्ते में पत्रावली हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।