फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामला संवेदनशील, पूरा देश होगा प्रभावित, हाईकोर्ट में ही सुना जाएगा केस

Sat, 27 May 2023 10:54 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने आदेश में कहा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा जो कभी महाराजा कंस की जेल थी, उसमें पूजा के अधिकार एवं उस पर बनी मस्जिद को हटाने का मामला दोनों धर्मों के करोड़ों हिंदू-मुसलमानों की भावना, आस्था व विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसमें कानूनों व संविधान के अनुच्छेदों की व्याख्या की जानी है।
विज्ञापन
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

श्रीकृष्ण जन्मभूमि- शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में शुक्रवार को दिए अपने फैसले में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व के साथ संवेदनशील है। इसमें कानूनी प्रश्न भी निहित हैं। इससे पूरा देश प्रभावित होगा। इस वजह से यह मामला हाईकोर्ट यानी राज्य की सर्वोच्च अदालत में ही सुना जाना सही होगा।

विज्ञापन


कोर्ट ने आदेश में कहा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा जो कभी महाराजा कंस की जेल थी, उसमें पूजा के अधिकार एवं उस पर बनी मस्जिद को हटाने का मामला दोनों धर्मों के करोड़ों हिंदू-मुसलमानों की भावना, आस्था व विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसमें कानूनों व संविधान के अनुच्छेदों की व्याख्या की जानी है।

वक्फ और ट्रस्ट में भेद तय करना है। कोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि विवाद मामले का हवाला देते हुए कहा है कि अधीनस्थ अदालत में इस मामले के ट्रायल में देरी होगी। न्याय हित व वादकारियों का समय बचाने के लिए राम जन्मभूमि की तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थल के मुद्दे का हल हाईकोर्ट में निकाला जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण मानव रूप में जेल में प्रकट हुए। मान्यता है कि जेल पर मस्जिद बनी हुई है। यह अधिकारों व इतिहास का भी विषय है। इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 लागू होगा या नहीं, यह तय होना है। संविधान के अनुच्छेद 25, 26, और 300ए, सेवायत, जन्मस्थान जैसे कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे। सभी मामले एक साथ हाईकोर्ट में सुने जाने से किसी के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व शाही ईदगाह मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने केसों के हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का विरोध किया है। कहा कि सिविल कोर्ट को ट्रायल करने का अधिकार है। वहां भी ट्रायल हो सकता है।

किंतु, हाईकोर्ट ने कहा लोक महत्व का मामला है। कई संवैधानिक व कानूनी व्याख्या के मुद्दे निहित हैं। जिनका निस्तारण हाईकोर्ट में किया जाना चाहिए। कोर्ट ने जिला जज मथुरा को वादों की सूची तैयार कर दो हफ्ते में पत्रावली हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें