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हाईकोर्ट ने कहा : एक-दूसरे के जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा की रक्षा करना पति-पत्नी का कर्तव्य

Fri, 22 Sep 2023 01:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

परिवार न्यायालय ने पत्नी के भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह सात हजार रुपये की राशि निर्धारित की है। पति का तर्क था कि उसका वेतन साढ़े सोलह हजार रुपये है। परिवार न्यायालय ने कहा, तथ्यों का सही आकलन नहीं किया गया।
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि विवाह के बने रहने तक कमाने वाले पति या पत्नी का कर्तव्य है कि वह एक-दूसरे के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करें। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार चतुर्थ की पीठ ने परिवार न्यायालय झांसी की ओर से हिंदू विवाह अधिनियम-1955 की धारा-24 के तहत पारित आदेश को चुनौती देने वाली संतोष कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

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परिवार न्यायालय ने पत्नी के भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह सात हजार रुपये की राशि निर्धारित की है। पति का तर्क था कि उसका वेतन साढ़े सोलह हजार रुपये है। परिवार न्यायालय ने कहा, तथ्यों का सही आकलन नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने कहा, पत्नी के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम राशि प्रदान की जानी चाहिए। पति ने अपनी याचिका में भरण पोषण भत्ता और कम किए जाने की मांग की थी। न्यायालय ने याची पति को पांच हजार रुपये देने का आदेश पारित किया।

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