न्यायमूर्ति शमशेरी ने कहा, न्याय का अनुपालन ही धर्म है। अधिवक्ता परिषद सिर्फ एक संगठन नहीं अपितु समग्र भारत का विचार है। इस संगठन को मूर्त रूप देने के लिए भारतवर्ष के एक महान विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी ने 1992 में पहल की गई जो अपनी सार्थक तथा निरंतर गति से आज इस पायदान तक पहुंचा है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा है कि अधिवक्ता सिर्फ मुकदमा करने तक ही सीमित न रहकर न्याय के निष्पादन को भी सशक्त बनाने में अपनी सार्थक भूमिका का निर्वाह करें। अधिवक्ता परिषद काशी प्रांत की हाईकोर्ट इकाई के स्थापना दिवस पर बृहस्पतिवार को आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने परिषद के ध्येय वाक्य न्याय मम धर्म को रेखांकित किया।
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न्यायमूर्ति शमशेरी ने कहा, न्याय का अनुपालन ही धर्म है। अधिवक्ता परिषद सिर्फ एक संगठन नहीं अपितु समग्र भारत का विचार है। इस संगठन को मूर्त रूप देने के लिए भारतवर्ष के एक महान विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी ने 1992 में पहल की गई जो अपनी सार्थक तथा निरंतर गति से आज इस पायदान तक पहुंचा है। अधिवक्ता परिषद का महत्वपूर्ण कार्य भारतीय मूल्यों को पुनर्जीवित करना और न्यायपालिका में सुधार के लिए आवश्यक प्रयास करना है। ऐसे आयोजन निरंतर होने चाहिए।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने भी अपनी बात कही। इसी क्रम में सृष्टि सिंह ने संगठन के ध्येय एवं दृष्टि के संदर्भ में विचार रखे। लाइब्रेरी हाल में इकाई अध्यक्ष राजकुमारी की अध्यक्षता में हुए कार्र्यक्रम का संचालन प्रतीक मिश्रा ने किया। पुष्प गुच्छ एवं तुलसी का पौधा देकर अतिथियों का स्वागत किया गया।
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कार्यक्रम में काशी प्रांत के उपाध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी एवं महामंत्री नीरज सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ.राजेश्वर त्रिपाठी, अश्वनी त्रिपाठी, वरुण सिंह, प्रियंका शर्मा, वत्सला उपाध्याय, शशि, प्रभूतिकांत त्रिपाठी, सौमित्र द्विवेदी, विनायक रंजन पांडेये, दिव्यांश, योगेश, सिद्धार्थ बघेल, प्रतीक, आशुतोष शुक्ला, सौम्य श्रीवास्तव रहे।