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हाईकोर्ट ने कहा : आश्रित के पास कृषि भूमि होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इन्कार नहीं कर सकते

Thu, 20 Jun 2024 11:31 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याची के पिता जिला गन्ना अधिकारी चंदौसी में क्लर्क पद पर कार्यरत थे। इस दौरान 13 नवंबर 2011 को उनकी मौत हो गई। इस दौरान अमन की आयु नौ साल थी। जब वह बालिग हुआ तो अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। राज्य समिति और जिला गन्ना अधिकारी ने आवेदन निरस्त कर दिया।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मृत कर्मचारी के आश्रित के पास कृषि भूमि है, इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति देने से इन्कार नहीं कर सकते। आश्रित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखना चाहिए कि पहले कैसी थी और अब क्या है। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि परिवार पर जिम्मेदारियां क्या हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने संभल निवासी अमन पाठक की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची के पिता जिला गन्ना अधिकारी चंदौसी में क्लर्क पद पर कार्यरत थे। इस दौरान 13 नवंबर 2011 को उनकी मौत हो गई। इस दौरान अमन की आयु नौ साल थी। जब वह बालिग हुआ तो अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। राज्य समिति और जिला गन्ना अधिकारी ने आवेदन निरस्त कर दिया। कहा कि मृतक कर्मचारी की पत्नी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करती हैं। साथ ही कृषि योग्य भूमि उनके पास है। पति की मौत के बाद उनकी पत्नी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया। ऐसे में अब परिवार को अनुकंपा नियुक्ति की जरूरत नहीं है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

कोर्ट ने कहा कि संबंधित विभाग ने परिवार की आर्थिक स्थिति की सही समीक्षा नहीं की। कोर्ट ने कहा कि आंगनबाड़ी एक संविदा का पद है। इससे उसे मात्र छह हजार रुपये महीने में मिलते हैं। कृषि भूमि भी बहुत कम है। अधिकारियों ने यह नहीं जानना चाहा कि उस कृषि भूमि से वार्षिक आय कितनी होती है।

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कोर्ट ने कहा कि पिता की मृत्यु के समय याची नाबालिग था। बालिग होते ही उसने आवेदन किया है। याची का परिवार पिछले 12 वर्षों से सामान्य जीवन जी रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि परिवार आर्थिक रूप से संघर्ष नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने जिला गन्ना अधिकारी संभल का 30 सितंबर 2023 और राज्य गन्ना प्राधिकारी का 25 नवंबर 2023 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही एक माह के भीतर याची को अनुकंपा नियुक्ति देने के संबंध में नए सिरे से आदेश पारित करने का आदेश दिया।

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