इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक से पीड़ित व्यक्ति के प्रति अधिकारियों को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने जिला अधिकारी हापुड़ को निर्देश दिया कि वह याची के दावे की जांच करें और प्रधानमंत्री राहत कोष से जो भी दावा बनता हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक से पीड़ित व्यक्ति के प्रति अधिकारियों को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने जिला अधिकारी हापुड़ को निर्देश दिया कि वह याची के दावे की जांच करें और प्रधानमंत्री राहत कोष से जो भी दावा बनता हो, उसका चार सप्ताह के भीतर भुगतान कराएं। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने दिया।
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हापुड़ निवासी याची असलम (27) पर 2016 में एसिड अटैक हुआ था। इस हमले में वह सौ प्रतिशत दिव्यांग हो गया। याची ने केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजना के तहत अनुग्रह राशि भुगतान के लिए प्रार्थना पत्र दिया। 24 मई 2024 को केंद्र सरकार की ओर से जिला मजिस्ट्रेट हापुड़ को पीड़ित के दावे की जांच करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी उसके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। याची ने दावे के भुगतान के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को एसिड हमले के पीड़ितों के मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर भुगतान राशि देने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।