बरेली जेल में बंद माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव को हाईकोर्ट से झटका लगा है। जेल में 21 वर्ष बिता चुका बबलू अब बाहर आना चाहता है, जिसके लिए उसने प्रदेश सरकार को प्रार्थनापत्र दिया है, मगर प्रार्थनापत्र तीन वर्षों से लंबित है। इसे लेकर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में प्रार्थनापत्र के निस्तारण का आदेश देने और तब तक जमानत पर रिहा करने की मांग की गई थी। बबलू का पक्ष रखने के लिए सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी आए थे, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता इमरानुल्लाह ने बबलू की रिहाई का विरोध किया। याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई की।
बबलू की याचिका में कहा गया कि उसे सिंगापुर एयरपोर्ट से 30 अगस्त 1995 को गिरफ्तार किया गया था, तब से वह जेल में बंद है। भारत सरकार ने उसका प्रत्यर्पण चार मुकदमों का ट्रायल चलाने के लिए सिंगापुर से किया था। इसमें एलडी अरोड़ा हत्याकांड, रामप्रताप सिंह चौहान की हत्या, ललित कुमार सुनेजा की हत्या और विश्वनाथ मित्तल अपहरण केस शामिल हैं। इन मुकदमों में से मात्र एलडी अरोड़ा हत्याकांड में बबलू को उम्रकैद की सजा मिली, जबकि शेष में वह बरी हो चुका है। कहा गया कि उम्रकैद की सजा भी वह 14 वर्ष काट चुका है। उसने शेष सजा माफ करने के लिए 14 सितंबर 2013 को प्रदेश सरकार को फार्म ए पर प्रार्थनापत्र दिया था, जो अभी तक लंबित है। वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी का कहना था कि याची के प्रार्थनापत्र को जानबूझकर लंबित रखा गया है, जबकि वह 21 वर्ष जेल में बिता चुका है और नियमानुसार सजा माफी पाने का हकदार है।
अपर महाधिवक्ता इमरानउल्लाह और एजीए विकास सहाय की दलील थी कि बबलू के प्रार्थनापत्र पर प्रदेश सरकार ने सभी संभव कदम उठाए हैं, चूंकि जिस मामले में उसे सजा मिली है उसकी जांच सीबीआई ने की है इसलिए सजा माफी पर निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार की सहमति आवश्यक है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि बबलू का प्रार्थनापत्र केंद्र सरकार के पास शीघ्रता से भेजा जाए। कोर्ट ने दोनों सरकारों से इस पर दो-दो माह में निर्णय लेने को कहा है।
बबलू का जमानत प्रार्थनापत्र खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि याची को टाडा कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ अपील खारिज हो चुकी है। जेल में रहते हुए भी उस पर आपराधिक गतिविधियां संचालित करने का आरोप है। इलाहाबाद में सराफा व्यापारी के अपहरण की साजिश रचने के लिए उसे नामजद किया गया है, इसलिए जमानत देने का कोई आधार नहीं है।