उत्तर प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जर्जर व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सात जजों की पीठ ने कहा कि प्रदेश की तमाम जिला अदालतें किराए के मकानों में चल रही हैं और जज भी किराए पर रह रहे हैं। हालात यह हैं कि जजों को फैसले अपने हाथ से लिखने पढ़ रहे हैं क्योंकि सरकार ने स्टेनो की नियुक्ति नहीं की है।
हाईकोर्ट समेत प्रदेश की निचली अदालतों की सुरक्षा तथा अधीनस्थ न्यायालयों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं को लेकर स्वत: कायम जनहित याचिका पर सुनाई का रही हाईकोर्ट के सात जजों की वृहदपीठ ने यह टिप्पणी महाधिवक्ता और सूबे के कई आला अधिकारियों की मौजूदगी में की। कोर्ट के आदेश के बावजूद समस्या का निदान करने में विफल सरकार व कोर्ट में उपस्थित हर विभाग के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में पीठ ने न्यायालयों की स्थिति और सरकार की नाकामी गिनाई।
महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कोर्ट से कहा कि वह पहली बार इस केस की सुनवाई में आए हैं। इस कारण उन्हें कुछ समय दिया जाए ताकि वह अधिकारियों से वार्ता कर सभी समस्याओं का हल निकाल सकें। कोर्ट ने महाधिवक्ता का अनुरोध स्वीकार कर इस केस की सुनवाई के लिए 27 अक्तूबर की तिथि तय की है।