फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट की टिप्पणी : किराये के मकानों में चल रहीं अदालतें, जज भी किराये पर, हाथ से लिखना पड़ता है फैसला

Wed, 13 Oct 2021 08:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अदालतों को मूलभूत सुविधा देने में सरकार की नाकामी पर हाईकोर्ट का रुख सख्त, मामले में हाईकोर्ट की सात जजों की पीठ 27 को करेगी सुनवाई
महाधिवक्ता ने कोर्ट के रुख को देख खुद ली समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी।
विज्ञापन
allahabad high court - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जर्जर व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सात जजों की पीठ ने कहा कि प्रदेश की तमाम जिला अदालतें किराए के मकानों में चल रही हैं और जज भी किराए पर रह रहे हैं। हालात यह हैं कि जजों को फैसले अपने हाथ से लिखने पढ़ रहे हैं क्योंकि सरकार ने स्टेनो की नियुक्ति नहीं की है।

विज्ञापन


हाईकोर्ट समेत प्रदेश की निचली अदालतों की सुरक्षा तथा अधीनस्थ न्यायालयों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं को लेकर स्वत: कायम जनहित याचिका पर सुनाई का रही हाईकोर्ट के सात जजों की वृहदपीठ ने यह टिप्पणी महाधिवक्ता और सूबे के कई आला अधिकारियों की मौजूदगी में की। कोर्ट के आदेश के बावजूद समस्या का निदान करने में विफल सरकार व कोर्ट में उपस्थित हर विभाग के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में पीठ ने न्यायालयों की स्थिति और सरकार की नाकामी गिनाई।

महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह  ने कोर्ट से कहा कि वह पहली बार इस केस की सुनवाई में आए हैं। इस कारण उन्हें कुछ समय दिया जाए ताकि वह अधिकारियों से वार्ता कर सभी समस्याओं का हल निकाल सकें। कोर्ट ने महाधिवक्ता का अनुरोध स्वीकार कर इस केस की सुनवाई के लिए 27 अक्तूबर की तिथि तय की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

हाथ से लिखने पड़ रहे फैसले
इसके पहले वृहदपीठ की अध्यक्षता कर रहे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी ने कहा कि प्रदेश में कई जगहों पर न्यायिक अधिकारियों को कोई सुविधा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कहीं-कहीं पर तो न्यायिक अधिकारी किराए के मकान में रह रहे हैं। कोर्ट भी किराए के स्थान पर चल रही है। न्यायिक अधिकारियों को आदेश खुद हाथ से लिखने पड़ रहे हैं। आदेश लिखने के लिए स्टेनोग्राफर की नियुक्ति नहीं की जा रही है। जजों ने कहा कि इस प्रकार हम अपने न्यायिक अधिकारियों को काम करने की अनुमति नहीं दे सकते।

सुरक्षा नदारद
जजों ने कहा कि जहां तक सुरक्षा का सवाल है, कोर्ट परिसरों में सुरक्षा नहीं है। हमारे न्यायिक अधिकारी दयनीय दशा में काम कर रहे हैं, जबकि उनसे अपेक्षाएं अधिक हैं।

रिटायर्ड जजों को भी मिले बेहतर सुविधा
हाईकोर्ट ने अपने रिटायर हो चुके जजों की सुविधा को लेकर भी कहा कि कई राज्यों में निर्णय लिया जा चुका है और बेहतर सुविधा दी जा रही है। परंतु हाईकोर्ट की कमेटी के कहने के बाद भी सरकार ने यहां कोई निर्णय नहीं लिया।

हाईकोर्ट ने लोवर ज्यूडिशियरी में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की तमाम समस्याओं को बताया और तल्ख लहजे में कहा कि आदेश का पालन कैसे कराया जाता है, यह उनको बखूबी मालूम है। कोर्ट में उपस्थित महाधिवक्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें सारी समस्याओं पर सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठकर बात करने का अवसर दिया जाए ताकि वह इसका उचित समाधान कर सकें और कोर्ट के आदेश पालन कराया जा सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें