इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम-1976 के प्रावधान का हवाला दिया। कहा, सुनवाई का अवसर दिए बिना पेड़ों की कटाई के आवेदन को खारिज करना अवैध है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम-1976 के प्रावधान का हवाला दिया। कहा, सुनवाई का अवसर दिए बिना पेड़ों की कटाई के आवेदन को खारिज करना अवैध है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने देवरिया के प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग के आदेश को रद्द कर दिया है।
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याची बिहारी लाल ने 10 सागौन के पेड़ों को काटने के लिए 13 फरवरी 2025 को ऑनलाइन आवेदन किया था। उप प्रभागीय वन अधिकारी की जांच रिपोर्ट में पेड़ों की उपस्थिति की पुष्टि कर कटाई की सिफारिश भी की गई थी। सक्षम प्राधिकारी ने 31 मई 2025 को जमीन से संबंधित विवाद सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित होने का हवाला देकर उसे खारिज कर दिया। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।