हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र व न्यायमूर्ति एसएचए रिजवी की खंडपीठ ने अंशुल धुमैरा की याचिका पर यह फैसला दिया। अंशुल धुमैरा की दलील थी कि तमाम पेठा निर्माताओं ने गैस कनेक्शन के लिए 2008 में आवेदन किया था, लेकिन यह नहीं दिया गया।
ताज ट्रैपेजियम जोन में पेठा निर्माताओं द्वारा रोक के बावजूद कोयले का इस्तेमाल करने पर औद्योगिक इकाई सील करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल 1997 के एमसी मेहता केस में ताजमहल परिक्षेत्र में कोयले के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अनुपालन में हुई कार्यवाही में कोई अवैधानिकता नहीं है।
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हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र व न्यायमूर्ति एसएचए रिजवी की खंडपीठ ने अंशुल धुमैरा की याचिका पर यह फैसला दिया। अंशुल धुमैरा की दलील थी कि तमाम पेठा निर्माताओं ने गैस कनेक्शन के लिए 2008 में आवेदन किया था, लेकिन यह नहीं दिया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि गैस अथॉरिटी को पक्षकार नहीं बनाया गया, न ही कनेक्शन नहीं देने का कारण ही बताया गया है। बावजूद इसके, गैस कनेक्शन न मिलने के आधार पर याची को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लघंन का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले, याची का कहना था कि वह पेठा निर्माता है। कोयले का इस्तेमाल करने के कारण पर्यावरण को नुकसान बताकर उसका लघु उद्योग सील कर दिया गया, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 9 जनवरी 2019 के सर्कुलर में पेठा उद्योग को स्माल इंडस्ट्रीज ग्रीन कैटेगरी में शामिल किया है। प्रतिदिन 12 मीट्रिक टन कोयला इस्तेमाल करने की छूट है। इसके जवाब में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता का कहना था कि यह आदेश अन्य क्षेत्रों के लिए है। ताज ट्रैपेजियम क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होगा।