इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शहर विकास व सुंदरीकरण के गठित संस्था प्रयागराज स्मार्ट सिटी लिमिटेड के औचित्य पर सवाल उठाया है। कोर्ट का कहना है कि जब पीडीए व नगर निगम जैसी संस्थाएं पहले से मौजूद हैं तो अलग संस्था की सेवा लेना का क्या औचित्य है। यह भी टिप्पणी की है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा शौचालयों का निर्माण समझ से परे है।
कोर्ट ने शौचालयों के निर्माण पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या शहर में विभिन्न स्थानों पर बनाए जा रहे शौचालय पीडीए के मास्टर प्लान के अनुसार बन रहे हैं।कोर्ट ने कहा कि शौचालय छोटे बने ।शहर का सुंदरीकरण हो,न कि सुंदरता नष्ट न की जाए। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर अरुण कुमार से अगली तारीख पर बताने को कहा है कि किस कानून के तहत यह संस्था काम कर रही है।