इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर बलवा व मारपीट के मामले को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट का समय बर्बाद करने पर दोनों पक्षों पर दो-दो हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। न्यायमूर्ति डॉ.गौतम चौधरी ने संजय और चार अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों में अपराध के तत्व मौजूद हैं। हालांकि, दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया है। इसलिए दोषसिद्धि की संभावना न के बराबर है। ऐसे मुकदमों को जारी रहने दिया जाता है तो अन्य मामलों के लिए नुकसानदेह है।
प्रयागराज के हंडिया में 2019 में संजय व चार अन्य पर बलवा, मारपीट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। सीजेएम कोर्ट इलाहाबाद के समक्ष समझौते के आधार पर मुकदमे को रद्द करने की अर्जी लंबित है। आरोपियों ने समझौते के आधार पर मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि कुछ गलतफहमी की वजह से विपरीत पक्ष ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। समय बीतने के साथ वे अपने मतभेदों को सुलझा लिए हैं, जिसे ट्रायल कोर्ट ने भी सत्यापित किया है। आरोपियों के खिलाफ मामले को विपक्षी आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं।
ऐसे में यदि अभियोजन को जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। वहीं, शासकीय दलील दी कि मुकदमे की कार्यवाही रद्द कर दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। कोर्ट ने दो-दो हजार रुपये दोनों पक्षों पर हर्जाना लगाते हुए मुकदमे को रद्द करने का आदेश दिया। यह राशि तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इलाहाबाद में जमा किया जाना चाहिए।