मामले में ललितपुर के याची अभिनव जैन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर अपने पुत्र से मिलने की मांग की थी। याची के अधिवक्ता गोपाल खरे ने तर्क दिया कि याची की पत्नी मेघा जैन उससे अलग रहती है और उसका पुत्र भी पत्नी के पास ही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि एक पिता को उसके पुत्र से मिलने से रोका नहीं जा सकता है। पिता को उसके पुत्र से मिलने का अधिकार है। पत्नी इसमें बाधा उत्पन्न नहीं कर सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा ने अभिनय जैन की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
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मामले में ललितपुर के याची अभिनव जैन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर अपने पुत्र से मिलने की मांग की थी। याची के अधिवक्ता गोपाल खरे ने तर्क दिया कि याची की पत्नी मेघा जैन उससे अलग रहती है और उसका पुत्र भी पत्नी के पास ही है।
याची को उसके बच्चे से मिलने नहीं दे रही है और रिकॉर्डों में पुत्र का नाम और उसके पिता का नाम भी बदल दिया है। कोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हवाला देते हुए पिता को उसके पुत्र से महीने में दो बार मिलने का आदेश दिया। इसके अलावा होली, दिवाली पर भी पिता अपने बेटे से मिल सकेगा। कहा कि प्रतिवादी पुत्र से मिलने में कोई बाधा नहीं उत्पन्न करेगी।