हाईकोर्ट ने 2002 में अलीगढ़ में अधिवक्ता के बेटे की हत्या के मुकदमे की सुनवाई अलीगढ़ से बाहर किए जाने की मांग नामंजूर कर दी है तथा सेशन कोर्ट अलीगढ़ को ट्रायल तीन माह में पूरा करने का आदेश दिया है। संजीव उर्फ रोबी, राघवेंद्र उर्फ कालू और योगेश की याचिका पर न्यायमूर्ति राजुल भार्गव ने सुनवाई की।
मामले के अनुसार याचीगण मुकदमे में आरोपी हैं और जमानत पर रिहा होने के बाद उनके भाग जाने के कारण मुकदमे का ट्रायल लंबे समय से लंबित है। लिहाजा, कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी और कुर्की का वारंट जारी किया है। याचीगण का कहना था कि वह नियमित रूप से अदालत मेें उपस्थित हो रहे थे। उनका बयान भी अदालत में दर्ज हो चुका है। मगर, 2010 में याचीगण पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए। इस वजह से कोर्ट की कार्यवाही में उपस्थित नहीं हो सके। याचीगण ने गैरजमानती वारंट और कुर्की का आदेश वापस लेने की अर्जी दी थी, मगर वह खारिज हो गई।
याचीगण का कहना था कि विपक्षी शिकायतकर्ता वकील है और उसके प्रभाव के कारण याचीगण को मुकदमे में निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। मुकदमा किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने की मांग की गई। कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और याचिका खारिज करते हुए ट्रायल तीन माह में पूरा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि याचीगण की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़े और कठोर कदम उठाए जाएं।