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हाईकोर्ट का आदेश : प्रभारी प्रधानाध्यापकों को दिया जाए प्रधानाध्यापक का वेतन, रामपुर जिले का है मामला

Wed, 31 Jul 2024 06:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याची रामपुर के स्कूलों में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन, उन्हें वेतन सहायक अध्यापक का दिया जा रहा है। प्रधानाध्यापकों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई। दलील दी कि वह सभी राज किशोरी कुशवाह के मामले में निर्धारित विधि व्यवस्था के मुताबिक वेतन पाने के हकदार हैं।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रभारी प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक का वेतन दो माह के अंदर बकाया सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची को सहायक अध्यापक का वेतन दिया गया, जबकि उसने संस्थान में अपनी सेवाएं प्रधानाध्यापक के रूप में दी हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत ने रामपुर के सौरभ पांडेय व 35 अन्य की याचिका पर दिया है।

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याची रामपुर के स्कूलों में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन, उन्हें वेतन सहायक अध्यापक का दिया जा रहा है। प्रधानाध्यापकों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई। दलील दी कि वह सभी राज किशोरी कुशवाह के मामले में निर्धारित विधि व्यवस्था के मुताबिक वेतन पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि मामले की जांच कर उन्हें बकाया सहित प्रधानाध्यापक का वेतन दिया जाए। 

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फिरोजाबाद...हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक को नियमित वेतन देने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद के ऐका ब्लाक स्थित प्राथमिक विद्यालय पैधात के सहायक अध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अध्यापक को नियमित वेतन देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सहायक अध्यापक अनुज कुमार गौतम की याचिका पर यह आदेश दिया है।

याची के वकील तनीषा जहांगीर मुनीर और अनुपम कुमार शुक्ला ने दलील दी कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी फिरोजाबाद बार-बार कारण बताओ नोटिस भेज कर याची को परेशान कर रहे हैं। याची की डिग्री की वैधता के संबंध में आठ दिसंबर 2023 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद अनुपस्थिति के बारे में 12 दिसंबर 2023 को दूसरा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

याची को अपना पक्ष रखने के लिए छोटी अवधि की तारीखें तय कीं, ताकि याची सुनवाई में शामिल न होने पाए। शिक्षक की कथित जाली डिग्री का मामला शीर्ष अदालत में लंबित है। फैसला आने तक कोई कार्रवाई न की जाए। अदालत ने याची को नियमित वेतन का भुगतान करने का निर्देश देते हुए शीर्ष न्यायालय के निर्णय लिए जाने तक कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है।
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