याची के अधिवक्ता आदर्श शुक्ल ने दलील दी कि याची वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में पिछले 22 साल से सेंट्रल जेल वाराणसी में बंद है। जेल नियमों व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर उनकी रिहाई की जानी चाहिए लेकिन जेल प्रशासन ने इसके लिए राज्य सरकार को कोई संस्तुति नहीं भेजी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के अपराध में 22 साल से उम्रकैद की सजा काट रहे दो सगे भाइयों की रिहाई पर सरकार को 22 अक्तूबर तक निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने शालू पांडेय उर्फ मंजीत पांडेय व लिटिल पांडेय की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता आदर्श शुक्ल ने दलील दी कि याची वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में पिछले 22 साल से सेंट्रल जेल वाराणसी में बंद है। जेल नियमों व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर उनकी रिहाई की जानी चाहिए लेकिन जेल प्रशासन ने इसके लिए राज्य सरकार को कोई संस्तुति नहीं भेजी है।
इस पर कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार व जेल अधीक्षक से जवाब मांगा था। समय से जवाब न देने पर जेल अधीक्षक को तलब किया था। इसके बाद जेल प्रशासन ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की नीति के अनुसार याचियों की समयपूर्व रिहाई के संबंध में फॉर्म-ए 5 दिसंबर 2023 व एक मार्च 2024 को सरकार को भेजा गया है। वह लंबित है। कोर्ट ने सरकार को लंबित संस्तुतियों पर 22 अक्तूबर तक निर्णय लेने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।