लोकनाथ अखाड़े में दांवपेच लड़ाते पहलवान।
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लोकनाथ के अखाड़े से निकले दो यूपी केसरी
लोकनाथ से ही निकले दो पहलवान देवकीनंदन पांडेय और पग्गू पहलवान को यूपी केसरी की उपाधि तक मिली। वहीं जिला चैंपियन रहे पहलवान भोलानाथ पांडेय ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चांदी की गदा भी जीती। उनके जीते गए चांदी के दोनों गदा की पूजा प्रत्येक वर्ष नागपंचमी के दिन अखाड़े में होती है। इसके बाद ही दंगल आरंभ होता है।
दर्शकों की तादाद भी सिमटी, गद्दे पर आई कुश्ती
पहले जब नागपंचमी पर अखाड़े में दंगल होता था तो उसे देखने के लिए छह से सात हजार लोग पहुंचते थे, लेकिन अब तीन से चार सौ लोग ही परंपरा का हिस्सा बनते हैं। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में कुश्ती के कोच अंकित तिवारी बताते हैं कि मिट्टी पर पहलवानी का क्रेज खत्म होने को है। अब नई पीढ़ी के पहलवान गद्दे पर कुश्ती कर रहे हैं। मिट्टी पर कुश्ती तो अब पंजाब और हरियाणा में भी सिमट गई है।
हल्दी-मट्ठा-नीम की पत्ती से तैयार होती है अखाड़े की मिट्टी
अखाड़े की मिट्टी बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए मिट्टी को पहले छाना जाता है। पानी का छिड़काव कर उसे नरम किया जाता है। फिर मिट्टी में मट्ठा, नीम की पत्ती और हल्दी पाउडर मिक्स करके छिड़काव किया जाता है, ताकि पहलवानों को किसी प्रकार का संक्रमण न होने पाए।
नागपंचमी पर लोकनाथ के अखाड़े में पहलवानों ने लगाए दांवपेच
नागपंचमी के मौके पर लोकनाथ स्थित अखाड़े में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में पहलवानों ने हिस्सा लिया। प्रयागराज के साथ ही आसपास के जिलों से पहलवान यहां पर दांवपेच लगाने के लिए पहुंचे थे। यहां पर कुंश्ती दंगल पूरे दिन चला। दंगल का शुभारंभ महापौर उमेशचंद्र गणेश केसरवानी ने किया। इस दौरान कई पहलवानों की कुश्ती बेहद रोमांचक रही। लोकनाथ का यह अखाड़ा काफी पुराना है। यहां पर रोज बड़ी संख्या में पहलवान पहुंचकर दांवपेच आजमाते हैं। नागपंचमी पर यहां पर दंगल का आयोजन किया जाता है। दर्शकों की भी भारी भीड़ जुटती है।