फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj : संगमनगरी में समय के दांव में कुश्ती के अखाड़े चित, शरीर सौष्ठव के लिए युवा कर रहे जिम का रुख

Fri, 09 Aug 2024 02:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

युवा अब अखाड़ों में कुश्ती-दंगल से ज्यादा जिम की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि इस बार नागपंचमी पर शहर के कई अखाड़े सूने नजर आएंगे। शहर में दर्जनभर से अधिक अखाड़ों पर ताला लग चुका है।
विज्ञापन
लोकनाथ अखाड़े में दांव-पेच लगाते पहलवान। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संगमनगरी में कुश्ती के अखाड़ों की चमक फीकी पड़ गई है। समय के साथ शारीरिक सौष्ठव की प्रतीक मिट्टी की कुश्ती अब मैट में तब्दील हो गई है। युवा अब अखाड़ों में कुश्ती-दंगल से ज्यादा जिम की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि इस बार नागपंचमी पर शहर के कई अखाड़े सूने नजर आएंगे। शहर में दर्जनभर से अधिक अखाड़ों पर ताला लग चुका है। वक्त के फेर में कुश्ती-दंगल बीते दिनों की यादों तक सिमटने की चीज हो गई है। करीब एक दशक में कई अखाड़ों के नामोनिशान तक मिट चुके हैं।

विज्ञापन











बंद होने वाले अखाड़ों में पहलवान गौरी गुरु का अखाड़ा, ललई पहलवान का अखाड़ा शामिल है। अकेले दारागंज में ही छह बड़े अखाड़े बंद हो चुके हैं। वहीं, लोकनाथ, कल्याणी देवी, दारागंज और झूंसी में ही अखाड़े ही चालू हालत में हैं। इसके अलावा जिन अखाड़ों में 60 से 70 पहलवान अभ्यास करने पहुंचते थे, वह संख्या अब 10 भी नहीं रह गई है। यही कारण है कि एक समय में हर मुहल्ले जहां अखाड़े से गुलजार रहा करते थे, वहां पर अब चार अखाड़े ही रह गए हैं। वहां भी दंगल महज रस्म अदायगी तक सिमट गया है।






विज्ञापन







जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष मुकेश यादव अतीत के दिनों को ताजा करते हुए बताते हैं कि यह शहर कभी पहलवानी का गढ़ हुआ करता था। विश्वविजयी अंतरराष्ट्रीय पहलवान गामा यहां पर 40 दिनों तक ठहरे और दंगल में अपनी कला का प्रदर्शन किया। गुरु हनुमान, चंदगी राम, जगदीश कालीरमण, झारखंडे राय, विद्या सागर, भोला पहलवान, कल्लू पंडित और शिव अवतार जैसे दिग्गज यहां पर दंगल कर चुके हैं। लोकनाथ व्यायामशाला के शिवनंदन पांडेय बताते हैं कि 1947 में देश की आजादी के बाद छुन्नन गुरु ने लोकनाथ व्यायामशाला की स्थापना की। तबसे लेकर यहां से कई नामचीन पहलवान निकल चुके हैं।

लोकनाथ अखाड़े में दांवपेच लड़ाते पहलवान। - फोटो : अमर उजाला।
लोकनाथ के अखाड़े से निकले दो यूपी केसरी

लोकनाथ से ही निकले दो पहलवान देवकीनंदन पांडेय और पग्गू पहलवान को यूपी केसरी की उपाधि तक मिली। वहीं जिला चैंपियन रहे पहलवान भोलानाथ पांडेय ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चांदी की गदा भी जीती। उनके जीते गए चांदी के दोनों गदा की पूजा प्रत्येक वर्ष नागपंचमी के दिन अखाड़े में होती है। इसके बाद ही दंगल आरंभ होता है।

दर्शकों की तादाद भी सिमटी, गद्दे पर आई कुश्ती

पहले जब नागपंचमी पर अखाड़े में दंगल होता था तो उसे देखने के लिए छह से सात हजार लोग पहुंचते थे, लेकिन अब तीन से चार सौ लोग ही परंपरा का हिस्सा बनते हैं। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में कुश्ती के कोच अंकित तिवारी बताते हैं कि मिट्टी पर पहलवानी का क्रेज खत्म होने को है। अब नई पीढ़ी के पहलवान गद्दे पर कुश्ती कर रहे हैं। मिट्टी पर कुश्ती तो अब पंजाब और हरियाणा में भी सिमट गई है।

हल्दी-मट्ठा-नीम की पत्ती से तैयार होती है अखाड़े की मिट्टी

अखाड़े की मिट्टी बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए मिट्टी को पहले छाना जाता है। पानी का छिड़काव कर उसे नरम किया जाता है। फिर मिट्टी में मट्ठा, नीम की पत्ती और हल्दी पाउडर मिक्स करके छिड़काव किया जाता है, ताकि पहलवानों को किसी प्रकार का संक्रमण न होने पाए।
विज्ञापन

नागपंचमी पर लोकनाथ के अखाड़े में पहलवानों ने लगाए दांवपेच  

नागपंचमी के मौके पर लोकनाथ स्थित अखाड़े में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में पहलवानों ने हिस्सा लिया। प्रयागराज के साथ ही आसपास के जिलों से पहलवान यहां पर दांवपेच लगाने के लिए पहुंचे थे। यहां पर कुंश्ती दंगल पूरे दिन चला। दंगल का शुभारंभ महापौर उमेशचंद्र गणेश केसरवानी ने किया। इस दौरान कई पहलवानों की कुश्ती बेहद रोमांचक रही। लोकनाथ का यह अखाड़ा काफी पुराना है। यहां पर रोज बड़ी संख्या में पहलवान पहुंचकर दांवपेच आजमाते हैं। नागपंचमी पर यहां पर दंगल का आयोजन किया जाता है। दर्शकों की भी भारी भीड़ जुटती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें