इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सहकारी समिति के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने की तारीख, समय और स्थान तय करने का अधिकार केवल डीएम के पास है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सहकारी समिति के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने की तारीख, समय और स्थान तय करने का अधिकार केवल डीएम के पास है। उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली-1968 के नियम 465 के तहत डीएम निर्धारित प्राधिकारी हैं। वह अधिकार किसी दूसरे अधिकारी को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने राजेश्वर की याचिका पर दिया है।
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मामला मेरठ की खजूरी, परीक्षितगढ़ स्थित प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समिति से जुड़ा है। 16 सितंबर 2025 को चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग की गई थी। इसके बाद सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक ने अपर जिला सहकारी अधिकारी को बैठक बुलाने का निर्देश दिया। छह अक्तूबर को बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पारित कर चेयरमैन को हटा दिया गया था। अमित त्यागी को कार्यवाहक चेयरमैन बनाया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव से निर्वाचित पदाधिकारी को हटाया जाता है, जिससे लोकतांत्रिक जनादेश प्रभावित होता है। इसलिए वैधानिक प्रक्रिया का अक्षरशः पालन जरूरी है।