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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी : अभिव्यक्ति का अधिकार अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए नहीं

Sun, 17 Jul 2022 02:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी स्वतंत्रता दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार चतुर्थ की खंडपीठ ने मुमताज मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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नरेंद्र मोदी-अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों को अपशब्द बोलने के मामले में जौनपुर के मीरागंज थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी संज्ञेय अपराध को अंजाम देने का खुलासा करती है। इसलिए प्राथमिकी में हस्तक्षेप करने के लिए कोई आधार नहीं बनता है।

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कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी स्वतंत्रता दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार चतुर्थ की खंडपीठ ने मुमताज मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पूरी आजादी देता है लेकिन इस अधिकार का प्रयोग किसी भी नागरिक के खिलाफ गाली-गलौज या अपमानजनक टिप्पणी करने तक नहीं है, यहां तक कि प्रधानमंत्री या अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी नहीं है। मामले में याची सोशल मीडिया (फेसबुक) अत्यधिक अपमानजनक टिप्पणी की थी।


इसके बाद उसकेखिलाफ आईपीसी की धारा 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था। याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने प्राथमिकी में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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