सिपाही विजय सिंह पर आरोप है कि उसने मारने की नियत से चलती ट्रेन पर शिकायतकर्ता मेहराबां को नीचे फेंक दिया। इस वजह से उसे गंभीर चोटें आईं। निचली अदालत ने सुनवाई करते हुए सिपाही को सात साल की जेल और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर जिला अदालत द्वारा हत्या के प्रयास के मामले में दर्ज प्राथमिकी पर दोषी करार दिए गए आरोपी सिपाही को राहत देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के फैसले में कोई दोष नहीं है। कोर्ट ने जमानत पर बाहर रह रहे अपीलकर्ता को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर सिपाही/अपीलकर्ता आत्मसमर्पण नहीं करता है तो संबंधित न्यायालय कार्रवाई कर सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव ने विजय सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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सिपाही विजय सिंह पर आरोप है कि उसने मारने की नियत से चलती ट्रेन पर शिकायतकर्ता मेहराबां को नीचे फेंक दिया। इस वजह से उसे गंभीर चोटें आईं। निचली अदालत ने सुनवाई करते हुए सिपाही को सात साल की जेल और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सिपाही ने जिला जज के अदालत के फैसले को चुनौती दी। अपीलकर्ता के विद्वान वकील और सरकारी अधिवक्ता नितेश कुमार श्रीवास्तव ने अपना-अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अपीलकर्ता के खिलाफ जिला अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकार रखा और अपील को खारिज कर दिया।