सुनवाई के दौरान खुला राज
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शिवचरण, हजारी लाल की ओर से दाखिल अपील का फैसला दूसरे आरोपियों जगन्नाथ व सरदार सिंह की अपील में पारित फैसलों में दर्ज था। लेकिन, लिपिकीय त्रुटि के कारण वह दूसरी फाइल में वह आदेश दर्ज नहीं हुआ। इसके कारण शिवचरण और हजारी लाल की फाइल लंबित मामलों की श्रेणी में शामिल हो गई। जब पुराने मामलों की सुनवाई शुरू हुई तो राज खुला। पता लगा कि पुलिस हिरासत में अदालत में पेश बुजुर्ग 39 साल पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि रजिस्ट्री के बाबुओं और वकीलों की चूक के कारण उन लोगों को हिरासत में लिया गया, जो दशकों पहले बरी हो चुके थे। - इलाहाबाद हाईकोर्ट