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High court: बिना विभाग की अनुमति के दूसरी शादी की, कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार

Wed, 17 Nov 2021 12:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक पत्नी के जीवित रहते सरकारी कर्मचारी द्वारा नियम 29 के तहत सरकार की अनुमति लिए बगैर दूसरी शादी करने के आरोपी को दंडित करने के राज्य लोक सेवा अधिकरण के फैसले पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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कोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत अंतर्निहित शक्तियों के प्रयोग की निश्चित सीमा है। साक्ष्यों व तथ्यों से याची के खिलाफ नियमावली का उल्लंघन करने व विभाग को गुमराह करने का आरोप साबित किया गया है। जिसके लिए वह दंड पाने का हकदार है।


कोर्ट ने पेंशन जब्त करने के विभागीय आदेश व अधिकरण द्वारा केस खारिज करने के आदेश को उचित ठहराया है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने सहारनपुर के मनवीर सिंह की याचिका पर दिया है।
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याची के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे का कहना था कि गलत बयानी का इतना कठोर दंड नहीं दिया जाना चाहिए। गलतफहमी के कारण याची ने शुरू में गलत तथ्य दिए किंतु बाद में सही तथ्य की जानकारी दी है।  5 सितंबर 70 को याची सहायक अभियोजक नियुक्त किया गया। पदोन्नति पाते हुए वरिष्ठ लोक अभियोजक पद से 31 दिसंबर 2004 को सेवानिवृत्त हो गया और इसके बाद 28 जून 05 को दंडित किया गया है। अधिकरण ने 2 सितंबर 21 को केस खारिज कर दिया।


इससे पहले उसकी पहली पत्नी राजेंद्री देवी ने दो शिकायतें कीं। बाद में समझौते के कारण विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दी गई। याची ने कहा कि उसे बच्चे नहीं हैं। 13 जुलाई 97 को अर्जी दी कि उसके दो बच्चे हैं और वह नसबंदी कराना चाहता है। जिसकी जांच बैठाई गई और याची को अपनी पत्नी को पेश करने को कहा गया। याची ने कहा कि राजेंद्री देवी व रजनी देवी एक ही हैं। दो औरतें नहीं हैं। किंतु उसने पत्नी को पेश नहीं किया तो जांच अधिकारी ने स्वयं जाकर राजेंद्री देवी का बयान लिया।


राजेंद्री देवी ने बताया कि दोनों अलग हैं। बच्चे नहीं हुए तो दूसरी शादी की। राजेंद्री गाजियाबाद तो रजनी बुलंदशहर की है। फिर याची ने बयान बदला। कहा कि उसने दूसरी शादी नहीं की। वह वैध शादी नहीं है। इसलिए नियम 29 उसके मामले में लागू नहीं होता। अधिकरण ने कहा दूसरी पत्नी से दो बच्चे हैं। नगर निगम के दस्तावेज से स्पष्ट है कि याची व रजनी पति पत्नी हैं। ऐसे में बिना विभागीय अनुमति लिए दूसरी शादी की। विभाग को गुमराह किया। परिणाम भी भुगतना होगा। हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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