फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court: अधिवक्ताओं के विरोध के बीच जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हुआ तबादला, शपथ ग्रहण का विरोध करने का निर्णय

Fri, 28 Mar 2025 08:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अधिवक्ताओं के आंदोलन के बीच जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया है। शुक्रवार को चौथे दिन भी वकील न्यायिक कार्य से विरत रहे। जस्टिस वर्मा का फाइनल तबादला आदेश जारी होने के बाद वकीलों में आक्रोश है। वार्ता के लिए शुक्रवार को रात नौ बजे बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी के आवास पर बैठक बुलाई गई है। इसमें आगे की रणनीति तय की जानी है। 
विज्ञापन
जस्टिस यशवंत वर्मा - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों के आंदोलन और हड़ताल के बीच न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया है। इससे वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आगे की रणनीति के लिए वकीलों की बैठक बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी के आवास पर शुक्रवार को रात नौ बजे होगी। शुक्रवार को चौथे दिन भी अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार जारी रहा। साथ ही चोरी छिपे न्यायिक कार्य कर रहे अधिवक्ताओं को चिन्हित कर उनको नोटिस जारी किया गया है। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। जस्टिस वर्मा का तबादला निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ता मंगलवार से ही न्यायिक कार्य से विरत चल रहे हैं। बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी विधि मंत्रालय के बुलावे पर दो दिन के दिल्ली दौरे पर थे। विधि मंत्री, सीजेआई समेत तमाम अधिकारियों से उनकी वार्ता हुई थी। शुक्रवार को जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए तबादला आदेश जारी कर दिया गया। 

उधर, दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादले का कड़ा विरोध करते हुए, इसके बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने शुक्रवार को इसे भारत की न्यायपालिका के लिए सबसे काला दिन बताया और घोषणा की कि वे उनके शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करेंगे। जस्टिस वर्मा के तबादले की अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में उनके आधिकारिक आवास पर कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी।
विज्ञापन


सोमवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनके तबादले की सिफारिश की थी। केंद्र ने शुक्रवार को उनके तबादले की अधिसूचना जारी की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील मंगलवार से हड़ताल पर हैं और शुक्रवार को तबादले के खिलाफ उनके विरोध का चौथा दिन है। शुक्रवार को पीटीआई से बात करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने उनके शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है। हमारी हड़ताल का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन लड़ाई जारी रहेगी।

तिवारी ने आगे कहा कि मुझे नहीं पता कि सरकार को यह तबादला अधिसूचना जारी करने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा, लेकिन हमें अभी भी भरोसा है कि वह हस्तक्षेप करेगी। हमने अपनी अगली कार्रवाई तय करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ आज रात एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। तिवारी ने कहा कि यह तबादला अनुचित था हम आम लोगों के लिए लड़ रहे हैं। यह अन्याय है और इलाहाबाद उच्च न्यायालय को कूड़े के ढेर में बदल दिया गया है।

विज्ञापन

न्यायमूूर्ति यशवंत वर्मा ने 33 साल पहले अधिवक्ता के रूप में शुरू की थी प्रैक्टिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति रहे एएन वर्मा के बेटे और दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूूर्ति यशवंत वर्मा ने 33 साल पहले प्रयागराज से ही बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस शुरू की थी। वह हाईकोर्ट के विशेष अधिवक्ता रहे और उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता भी बनाए गए। यहीं 2014 में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए। करीब साढ़े तीन साल पहले तबादला दिल्ली हाईकोर्ट में कर दिया गया।

न्यायमूूर्ति यशवंत वर्मा का जन्म भी प्रयागराज में ही हुआ। हालांकि, उनकी पढ़ाई-लिखाई बाहर हुई। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स किया। 1992 में मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी करके 8 अगस्त 1992 को अधिवक्ता के बतौर बार काउंसिल में पंजीकृत हुए।

जस्टिस वर्मा को संवैधानिक, औद्योगिक विवादों, कॉर्पोरेट टैक्सेशन और पर्यावरणीय मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। 2006 में विशेष अधिवक्ता बनाए जाने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुकदमों की पैरवी की।

उन्होंने 2012 से 2013 तक उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता के रूप में भी काम किया। इस बीच, वरिष्ठ अधिवक्ता नामित हो जाने पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता का पद त्याग दिया। 13 अक्तूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बनाए गए।

एक फरवरी 2016 को यहीं उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। करीब पांच साल तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम करने के बाद 11 अक्तूबर 2021 को उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट हो गया। घर से करोड़ों रुपये मिलने की सुर्खियों के बीच उनका तबादला फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें