न्यायमूूर्ति यशवंत वर्मा ने 33 साल पहले अधिवक्ता के रूप में शुरू की थी प्रैक्टिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति रहे एएन वर्मा के बेटे और दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूूर्ति यशवंत वर्मा ने 33 साल पहले प्रयागराज से ही बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस शुरू की थी। वह हाईकोर्ट के विशेष अधिवक्ता रहे और उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता भी बनाए गए। यहीं 2014 में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए। करीब साढ़े तीन साल पहले तबादला दिल्ली हाईकोर्ट में कर दिया गया।
न्यायमूूर्ति यशवंत वर्मा का जन्म भी प्रयागराज में ही हुआ। हालांकि, उनकी पढ़ाई-लिखाई बाहर हुई। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स किया। 1992 में मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी करके 8 अगस्त 1992 को अधिवक्ता के बतौर बार काउंसिल में पंजीकृत हुए।
जस्टिस वर्मा को संवैधानिक, औद्योगिक विवादों, कॉर्पोरेट टैक्सेशन और पर्यावरणीय मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। 2006 में विशेष अधिवक्ता बनाए जाने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुकदमों की पैरवी की।
उन्होंने 2012 से 2013 तक उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता के रूप में भी काम किया। इस बीच, वरिष्ठ अधिवक्ता नामित हो जाने पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता का पद त्याग दिया। 13 अक्तूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बनाए गए।
एक फरवरी 2016 को यहीं उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। करीब पांच साल तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम करने के बाद 11 अक्तूबर 2021 को उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट हो गया। घर से करोड़ों रुपये मिलने की सुर्खियों के बीच उनका तबादला फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया है।