इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेरठ को बेसिक स्वास्थ्य कर्मी की विवाहित पुत्री को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विमला श्रीवास्तव केस में कोर्ट ने विवाहिता पुत्री को भी परिवार में शामिल कर लिया है।
कोर्ट ने सीएमओ के नियुक्ति से इंकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है और तीन माह में नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने फिनिफ लोधी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची की मां सुधा भंडारी मेरठ के भुदब्रल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उप केन्द्र गोला बुधा में महिला स्वास्थ्य कर्मी थीं। सेवाकाल में उसकी मृत्यु हो गई तो पुत्री ने आश्रित कोटे में नियुक्ति की अर्जी दी। जिसे सीएमओ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि विवाहिता पुत्री मृतक सरकारी कर्मी के परिवार में शामिल नहीं है। जिसे चुनौती दी गई थी।